शुक्रवार, 13 नवंबर 2020

भारती मर्यादा


 उपदेश प्राप्त पुश्यात्माएँ परमात्मा कें मार्ग पा चलतीं हैं । वह परमात्मा प्राप्ति के लिए यात्रा प्रारंभ करती है । यात्री बहुत ही कम सामान लेकर यात्रा करता है । अधिक भार उठा कर यात्रा करना संभव नहीं होता । जो सांसारिक परम्पराऐ हैं, वे व्यर्थ का भार है जो भक्तिमार्ग में यात्रा करने में बाधक हैं ! इसलिए इस भार से मुक्त होने के लिए निम्न नियमों का पालन करना अनिवार्य है . 


१. किसी के पैर नहीं छूने हैं और ना ही दूसरे को छूने देना है यदि अचानक या मना करने पर भी पैर छू लेता है तो उस स्थिति में नाम खण्ड नहीं होता । आप ने किसी को बद्दुआ या आशीर्वाद नहीं देना है, न ही इच्छा करक किसी से आशीर्वाद लेना है कोई आप के सिर पर आशीर्वाद के लिए हाथ रखे तो आपने मना करना है, फिर भी कोई हाथ रख देता है तो आप का उपदेश सुरक्षित है परन्तु आप ने आशीर्वाद व बदृदुआ बिल्कुल नहीं देनी है । क्योंकि आशीर्वाद देने से आप की भक्ति कमाई जाती है । जैसे एक पहिए की ट्रयूब से दूसरे पहिए की ट्यूब में हवा डालने से आप की गाडी खडी हो जाएगी । आप को हानि हो जाएगी । एक उपदेशी बहन ने अपने अनुपदेशी भाई को स्वस्थ होने का आशीर्वाद दे दिया भाई तो स्वस्थ हो गया परन्तु बहन इतनी ,अस्वस्थ हुई की एक "महिना अस्पताल में रही । पुन: उपदेश लिया अपनी गलती की क्षमा याचना करने पर वह स्वस्थ हो पाई । इसलिए सर्व से प्रार्थना है कि यह गलति न करें। इसी प्रकार अन्य नियमों के खण्ड करने से ' आपकी राम नाम की गाडी में पंचर हो जाएगा वह भी रूक "जाएगी अर्थात् आप जी को हानि होगी । पूर्व समय में सतिप्रथा (परम्परा) थी । जिस किसी का पति मर'जाता था तो उसकी स्त्री को भी मृत पति के साथ जिंदा जलाया जाता था जो एक महा जालिम कर्म था उस समय के मानव समाज ने उस कुरीती को मजबूरन मानना पडता था । किसी महापुरूष ने संघर्ष करके उस सतिप्रथा को बन्द कराया । समाज के रूढीवादी व्यक्तियों ने बहुत विरोध भी किया, परन्तु प्रयत्न सफल हुआ तो आज सर्व बहनें सुखी हैं । इसी प्रकार ये सर्व परम्पराएँ जानों जो मानव समाज पर भार हैं । इनको समाप्त करने से ही भार मुक्त हो सकेंगे तथा भक्ति मार्ग पर आसानी से चल सकेंगे ।


2. टी. वी., कम्यूटर तथा मोबाइल में फिल्म, सीरियल, मैच, कार्टून देखना तथा मोबाइल में विडियो गेम आदि नहीं खेलना है । 


3. किसी को दान (बीना सिला कपड़ा, सीधा आदि) नहीं देना हैं, न ही किसी धार्मिक स्थल (मन्दिर, मैण्डी) के लिए पैसे देने हैं और न ही उनक किसी भंडारे में जाना है। जैसेधर्मशाला, गली पवकी करने, कुआं तथा तालाब (जोहड़) की खुदाई, खेतों के साझले नाले की खुदाई तथा अन्य इसी प्रकार के सामूहिक सामाजिक कार्यो के लिए पैसे दे सकते हैं ।


4. माथे पर तिलक न लगाना है और न ही लगवाना है, भात में पटड़े पर नहीं चढ़ना है, गले में माला नहीं डलवानी है और न ही डालनी है और नही किसी की झोली में पैसे डालने या लेने हैं । यदि दोनों पक्ष उपदेशी हैं तो विवाह केवल असुर निकन्दन रमैणी करके साधारण विधि से करना है तथा भात परम्परा को समाप्त करना है 


5. कोई त्यौहार, जागरण, मुण्डन, धार्मिक अनुष्ठान जन्मदिन, छटी आदि नही मनाना है, न ही उसमें जाना व सहयोग करना है । , 


6. किसी को दुआ या बदृदुआ नहीं देनी है ।


7. किसी को Good morning, Good afternoon, Good evening, Good night, आदि शब्द नहीं बोलने हैं यदि कोई बोलता है तो उसे समय अनुसार केवल Morning Morning Evening Evening Afternoon व Night Night दो-दो बार बोल दें


8. Happy Birthday, Happy New year, तथा Good bye, आदि शब्द नहीं बोलने हैं यदि कोई आपसे बोलता है तो उसे धन्यवाद या Thank you बोल दे


9. सिक्खों को छोड़कर संत-बाबा रूप में दाढी न हो।


10. बहनों ने नेल पालिस ओर लिपिस्टिक नही लगानी हैं ।


11. परफ्यूम तथा सेंट आदि नहीं लगाना है ।


12. विवाहित बहनें केवल सिन्दूर या बिन्दी में से एक चीज लगा सकती हैं ।


13. किसी अनउपदेशी का झूठा नहीं खाना है यदि अनजान में खाया है तो क्षमा होता हैं । भविष्य में ध्यान रखें ।


14. हाथों पर मेंहदी नहीं लगानी है । किसी बिमारी के कारण लगा सकते है, सिर में लगा सकते हैं । हाथों में मेहंदी लगाने से नाम खण्ड होता है ।


15. शादी में जाते है तो पैसे (शगुन' वारफेरी, मुंह दिखाई पर पैसे) नहीं देने है । विदाई के समय घर में नारियल नहीं फोड़ना है, कन्याविदाई के समय गाडी पर पानी डालना या धवका लगाना आदि सगुन करना मना है ।


16. किसी को किसी भी अवसर पर Gift देना मना है 1 अगर कोई 6111दे तो कोशिश करनी है ना लो 1 अगर कोई पीछे से रख जाऐ या डाक या कोरियर द्वारा भेजे तो उसको रख लें उनके उपलक्ष में कुछ रूपये दान आश्रम में कर दें ।


17. परिवार में किसी की भी शादी हो तो परिवार के अन्य सदस्यों के लिए कपड़े आदि नहीं देने व नहीं लेने हैं । 


18. कन्या दान रूप में कपड़े, गहने आदि नहीं देने हैं। रूपये भी इस उपलक्ष में देने हैं कि आप ने वहां खाना खाया है । और बहन के घर जाते है तो इसी उद्देश्य से पैसे दे सकते हैं कि आपने वहां खाना खाया है या चाय आदि पी है यदि अधिक धन दे दिया तो आप की बहन पर आप का ऋण न हो जाए तथा संस्कार न जुड जाऐं । क्योंकि हम संस्कार वश ही यहां काल जाल में रह जाते हैं । यदि आप पैसा देना चाहें और बहन न लेवे तो दोनों ही भार मुक्त हो जाते हैं । यदि बहन-बुआ जी आदि उपदेशी हैं तो उन को चाहिए कि वह पैसा रूपया-कपड़ा आभूषण कदापि न लें । प्यार से कहें कि आपने कह दिया, हमने मान लिया, ऐसे शिष्टाचार से मना कर दें । 


19. स्कूल में गायत्री मन्त्र बोलते समय ओं३म् शब्द नहीं बोलना है । क्योंकि जिसे गायत्री मंत्र कहते है यह यजुर्वेद कं अध्याय 36 का मंत्र 3 है । मूल पाठ में ओ३म् मन्त्र नहीं है । वेद परमात्मा की अनूठी देन है इसमें वृद्धि या कटौती करना, परमात्मा का अपमान है, लाभ के स्थान पर हानि ही होती है, इस लिए इस मन्त्र के साथ ओउम् नहीं बोलना है । यजुर्वेद के अ. 36 मंत्र 3 अर्थात् कथित "गायत्री मंत्र” मात्र परमात्मा की महिमा का एक मंत्र है । इसे पढने से परमात्मा के गुणों का ज्ञान होता है । जैसे बिजली की महिमा कहीं लिखी हो उसको कविता बनाकर गाते रहने से बिजली के गुणों का ज्ञान है परन्तु बिजली का लाभ नहीं मिल सकता लाभ तो बिजली का कनेक्शन लेने से ही मिलेगा इसी प्रकार यजुर्वेद अध्याय 36 मंत्र 3 जिसको गायत्री मंत्र बताकर जाप करने को कहते हैं वह व्यर्थ है । क्योंकि यह मंत्र तो परमात्मा की महिमा का ज्ञान कराता है । परमेश्वर के गुणों अर्थात् लाभ को बताता है । वह लाभ अधिकारी संत से सत्यनाम व सारनाम की दीक्षा प्राप्त करके अर्थात् कनेक्शन लेकर ही प्राप्त हो सकते हैैं यजुर्वेद अध्याय 36 मंत्र 3 अर्थात् गायत्री मंत्र की आवृर्ति करने से नहीं फिर भी कोई अज्ञानी व्यक्ति विद्यार्थियों को विवश ' करे तो 🕉️ शब्द का उच्चारण न करें केवल गायत्री मंत्र का भुर्भव: स्व: से ही उच्चारण प्रारम्भ करें । "ओ३म" एक अक्षर को न लगाएँ अध्यापकों को चाहिए कि यजुर्वेद अध्याय 36 मंत्र 3 की अपेक्षा सन्त गरीबदास जी महाराज की वाणी से मंगलाचरण विद्यार्थीयों से बुलाए' । गायत्री मंत्र से कई गुणा लाभ होता है परन्तु सत्यनाम बिना सब व्यर्थ है ।

 20. किसी मुर्दे के अंतिम संस्कार में लकड़ी डाल सकते हैं ! कंधे पर या'अन्य साधन द्वारा शव को ले जा सकते हैं !

 21. मुर्दे पर एक से अधिक कफन नहीं डालना है यदि आप से पहले किसी ने कफन डाल रखा हैं तो आप ने कफन नहीं डालना हैं क्योंकि कफन केवल एक ही होता है अगर पहले कफन डाल रखा है फिर किसी ने एक से ज्यादा कफन डाला है तो नाम खण्ड होता है ! 


22. शादी में खाना खा सकते है, लड़के या लड़की की शादी में खाना खाकर आते हैं यह मान कर पैसे दे सकते हैं कि आपने वाहां भोजन खाया हैं ।


23. यदि दोनों पक्ष उपदेशी हैं तो पीलिया देना, छुछक देना बन्द करना है । एक पक्ष अनुपदेशी है तो केवल एक २ जोडी कपड़े केवल जच्चा व बच्चे के देने हैं ।


24. नौकरी पर आॅफिस में जब कोई रिटायर होता है तो आॅफिस में सभी आपस में पैसे इकठ्ठे करके उसे Gift तथा पार्टी देते हैं ऐसा कर सकते हैं । (इसमें थोडा बहुत दे सकते हैं) लेकिन उपदेशी ने कतई नहीं लेना है । 


25. घर में जब बहन आती है तो उसे कपड़े व पैसे नहीं देने हैं । अगर बहन या बेटी अनुपदेशी है तो बहुत कम एक २ जोडी कपडे दे सकते है । बच्चों के लिए खाने पीने का सामान दे सकते हैं और अगर जब बहन के घर जाते हैं तो साथ में बच्चों के लिए फल, मिठाई आदि ले जा सकते हैं । 


26. स्कूल में विदाई पार्टी के समय बच्चे पैसे दे सकते हैं ।

 27. गौशाला में पैसा नहीं, चारा आदि दे सकते हैं । 


28. शादी की मिठाई कोई घर में लेकर आए तो और कुछ शादी के नाम के कार्ड के साथ मिठाई लाते हैं तो हृदय से मना करें । फिर भी कोई रख जाए तो खा सकते हैं उस के बदले में कुछ रूपये आश्रम में दान कर दें । आप पर भार नहीं रहेगा। अगर उपदेशी परिवार शादी में मिटाई बनाए तो वो आई हुई रिश्तेदारी या बहन को मिठाई बांधकर दे सकते है, परन्तु यह मिठाई बनाने की परम्परा ही गलत है सामान्य भोजन बनाऐं जैसे अतिथि का सत्कार करने के लिए बनाते हैं खीर, खाण्ड हल्वा बना सकते हैं । 


29. भगत भाई आपस में उधार सामान एक दूसरे से ले सकते हैं और अगर आपस में एक दूसरे के घर आते जाते हैं तो बच्चों के लिए खाने पीने का सामान ले जा सकते हैं । 


30. भाई या बहन की आर्थिक स्थिति कमजोर हो तो आर्थिक या अन्य मदद उधार रूप में कर सकते हैं । बहन को चाहिए कि उस पैसे को लौटाए जिस से उस पर भार नहीं बनेगा । यदि बहन धन लौटाने में असमर्थ है तो' भाई कभी बहन पर पैसे लौटाने का दबाब न बनाए । 


31. लड़की की शादी में माता पिता अपनी लड़की को एक दो जोड़ी कपड़े दे सकते हैं पैसे नहीं, अगर लड़के की शादी में लड़की वाले बगैर नाम वाले है और वो अगर जबरदस्ती अपनी लड़की को कुछ देना चाहे तो इसी प्रकार लड़की की शादी में लड़के वाले अनउपदेशी कुछ मांग करे तो स्पष्ट मना कर दें बिल्कुल नहीं लेना देना हैं । 


32. जिन लडकियों का विवाह होता है वे जिन कपड़ो को पहन कर विवाह मण्डप अर्थात रमैणी में बैठे उन्हीं कपड़ों में अपनी ससुराल जाऐं । अन्य पोशाक न बदले किन्हीं परिस्थितियों में बदलनी पडें (जैसे मिट्टी लग जाए' गीली हो जाए या अन्य कारण से खराब हो जाए) तो बदल सकतें हैं । अन्यथा नहीं । देखने में आया है कि कुछ बहनें रमैणी में विवाह के समय सामान्य पोषाक पहनती है‘ बाद ने तड़क भड़क वाली पोषाक पहन कर ससुराल जाती है' 

वह मर्यादा के विरूद्ध है । विवाह के समय जैसी भी नई या' पुरानी पोषाक पहन रखी है, उसी को पहन कर ससुराल जाऐ, अन्य या उपरोक्त परिस्थितियों मे' पोषाक बदली जा सकती है । 


33 आपके द्वार पर कोई भिक्षुक आता या कहीं बाजार में आप से कोई भिक्षा माँगता है तो उसे पैसे न दें खाना खिला दें । यदि उसको वस्त्र की आवश्यकता है तो वस्त्र बिना सिला न दें, पुराना या नया सिला हुआ कपड़ा दें ' कम्बल या चादर भी पुराना दें नहीं तो अधिकतर भिक्षुक शराबी कवाबी हैं, नए कपडों को बेचकर शराब आदि नशीली वस्तुओं का प्रयोग करते हैं वह दोष दान करने वाले को भी लगेगा । एक श्रद्धालु ने कहा कि यह अच्छा सा नहीं लगता कि भिक्षुक को रूपये न दें, आत्मा नहीं मानती? उस के लिए उत्तर तथा एक उदाहरण यह है कि एक भद्रपुरूष ने एक भिखारी को 1०० रूपयों की भिक्षा दे दी । पहले वह भिक्षुक पाव शराब पीता था अपनी पत्नी व परिवार को परेशान करता था । उस दिन 100 रूपये प्राप्त होने के कारण उस भिखारी ने आधा बोतल शराब पी ली । शराब के नशे में अपनी पत्नी को पीट डाला । उस भिखारी की पत्नी ने बच्चों समेत आत्महत्या कर लीं । उस जैनटलमैन के सौ रूपये के दान ने एक परिवार को उजाड दिया । इसका दोष दानकर्ता को है । गीता में लिखा है कि कुपात्र को किया दान लाभ के स्थान पर हानि करता है । कबीर परमेश्वर जी कहतें हैं : 


गुरु बिन माला फेरते गुरु बिन देते दान । गुरु बिन दोनों निस्फल हैं, पूछो वेद पुरान । । 


34. किसी भी नियम के खण्डित हो जाने पर आप को परमेश्वर से मिलने वाला लाभ बन्द हो जाएगा। जैसे बिजली का कनैक्शन कट जाने पर सर्व लाभ बन्द हो जाते हैं । जो कार्य बिजली से होने थे वे रूक जाते हैं । इसी प्रकार परमात्मा की शक्ति से जो आपको तथा आपके परिवार को लाभ मिलना था वह रूक जाता है । एक बहन ने बताया कि उसके पति ने दीक्षा भी ले रखी है किसी भी नियम का पालन नहीं करता । इसी प्रकार एक भक्त ने अपनी पत्नी की शिकायत की । उसके विषय में यह जाने कि उनका नाम खण्डित हो चुका है ऐसे व्यक्तियों का कोई भयंकर पाप कर्म है । नाम खपिडत होने पर वह पापकर्म अपना प्रभाव करके हानि करेगा जब तक मर्यादा में रहकर भक्ति करते हैं तो वह पाप कर्म हानि नहीं कर सकता । 


एक बहन ने ऐसे ही नाम खपिडत कर रखा था कुछ वर्षों के पस्चात् उसकी जीभ में केंसर का रोग हो गया उस बहन से पूछा कि क्या अब आपको टीवी. देखना, लिपिस्टीक लगाना अच्छा लगता है? उसने रोते हुए कहा नहीं-नहीं । 


इसी प्रकार परिवार व शरीर में हानी से बचने के लिए तथा परमात्मा से लाभ प्राप्त करके मोक्ष प्राप्ति के लिए मर्यादा में रहे अन्यथा पाप कर्म आपको क्षति कर देगा । 


इसलिए सर्व मुपयात्माओं से पुनः निवेदन है कि सर्व नियमों का विधीवत् पालन करके मानव जीवन को सफल बनाये तथा पूर्ण मोक्ष प्राप्त करके सदा सुखी बने, सतलोक में निवास करें । 


जो विद्यार्थी शिक्षा समय में मौज मरती करते हैं वे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं आजीवन कष्ट उठाते हैं । जो शिक्षा के समय मे मौज मस्ती न करके लगन से शिक्षा पूरी कर जाते है तो उनको विद्यालय में किये प्रयत्न का फल बाहर क्षेत्र में नौकरी द्वारा प्राप्त होता है । इसी प्रकार सर्व मानव परमात्मा प्राप्ति के विद्यालय में विद्यार्थी (भक्त) हैं । जो भक्त मौज मस्ती करते हैं । भक्ति तथा नियमों का पालन न करके अन्य प्राणियों के शरीरों में घोर कष्ट उठायेंगे । जो लगन के साथ मर्यादा में रहकर परमेश्वर कबीर जी की भक्ति साधना जगत गुरु संत रामपाल जी महाराज से प्राप्त करके आजीवन करते रहेंगे उनको सत्यलोक में सर्व सुविधाएँ प्राप्त होगी वहाँ वृद्ध अवस्था नहीं है मृत्यु भी नहीं होती ऐसा ही जीवन है, नर-नारी व परिवार है वह कभी मृत्यु को प्राप्त नहीं होता । इसलिए सत्य भक्ति करके अपना जीवन सफल बनायें । जिस सत्य भक्ती से आपको यहां भी सर्व आवश्यक सुउपदेश प्राप्त पुश्यात्माएँ परमात्मा कें मार्ग पा चलतीं हैं । वह परमात्मा प्राप्ति के लिए यात्रा प्रारंभ करती है । यात्री बहुत ही कम सामान लेकर यात्रा करता है । अधिक भार उठा कर यात्रा करना संभव नहीं होता । जो सांसारिक परम्पराऐ हैं, वे व्यर्थ का भार है जो भक्तिमार्ग में यात्रा करने में बाधक हैं ! इसलिए इस भार से मुक्त होने के लिए निम्न नियमों का पालन करना अनिवार्य है . 


१. किसी के पैर नहीं छूने हैं और ना ही दूसरे को छूने देना है यदि अचानक या मना करने पर भी पैर छू लेता है तो उस स्थिति में नाम खण्ड नहीं होता । आप ने किसी को बद्दुआ या आशीर्वाद नहीं देना है, न ही इच्छा करक किसी से आशीर्वाद लेना है कोई आप के सिर पर आशीर्वाद के लिए हाथ रखे तो आपने मना करना है, फिर भी कोई हाथ रख देता है तो आप का उपदेश सुरक्षित है परन्तु आप ने आशीर्वाद व बदृदुआ बिल्कुल नहीं देनी है । क्योंकि आशीर्वाद देने से आप की भक्ति कमाई जाती है । जैसे एक पहिए की ट्रयूब से दूसरे पहिए की ट्यूब में हवा डालने से आप की गाडी खडी हो जाएगी । आप को हानि हो जाएगी । एक उपदेशी बहन ने अपने अनुपदेशी भाई को स्वस्थ होने का आशीर्वाद दे दिया भाई तो स्वस्थ हो गया परन्तु बहन इतनी ,अस्वस्थ हुई की एक "महिना अस्पताल में रही । पुन: उपदेश लिया अपनी गलती की क्षमा याचना करने पर वह स्वस्थ हो पाई । इसलिए सर्व से प्रार्थना है कि यह गलति न करें। इसी प्रकार अन्य नियमों के खण्ड करने से ' आपकी राम नाम की गाडी में पंचर हो जाएगा वह भी रूक "जाएगी अर्थात् आप जी को हानि होगी । पूर्व समय में सतिप्रथा (परम्परा) थी । जिस किसी का पति मर'जाता था तो उसकी स्त्री को भी मृत पति के साथ जिंदा जलाया जाता था जो एक महा जालिम कर्म था उस समय के मानव समाज ने उस कुरीती को मजबूरन मानना पडता था । किसी महापुरूष ने संघर्ष करके उस सतिप्रथा को बन्द कराया । समाज के रूढीवादी व्यक्तियों ने बहुत विरोध भी किया, परन्तु प्रयत्न सफल हुआ तो आज सर्व बहनें सुखी हैं । इसी प्रकार ये सर्व परम्पराएँ जानों जो मानव समाज पर भार हैं । इनको समाप्त करने से ही भार मुक्त हो सकेंगे तथा भक्ति मार्ग पर आसानी से चल सकेंगे ।


2. टी. वी., कम्यूटर तथा मोबाइल में फिल्म, सीरियल, मैच, कार्टून देखना तथा मोबाइल में विडियो गेम आदि नहीं खेलना है । 


3. किसी को दान (बीना सिला कपड़ा, सीधा आदि) नहीं देना हैं, न ही किसी धार्मिक स्थल (मन्दिर, मैण्डी) के लिए पैसे देने हैं और न ही उनक किसी भंडारे में जाना है। जैसेधर्मशाला, गली पवकी करने, कुआं तथा तालाब (जोहड़) की खुदाई, खेतों के साझले नाले की खुदाई तथा अन्य इसी प्रकार के सामूहिक सामाजिक कार्यो के लिए पैसे दे सकते हैं ।


4. माथे पर तिलक न लगाना है और न ही लगवाना है, भात में पटड़े पर नहीं चढ़ना है, गले में माला नहीं डलवानी है और न ही डालनी है और नही किसी की झोली में पैसे डालने या लेने हैं । यदि दोनों पक्ष उपदेशी हैं तो विवाह केवल असुर निकन्दन रमैणी करके साधारण विधि से करना है तथा भात परम्परा को समाप्त करना है 


5. कोई त्यौहार, जागरण, मुण्डन, धार्मिक अनुष्ठान जन्मदिन, छटी आदि नही मनाना है, न ही उसमें जाना व सहयोग करना है । , 


6. किसी को दुआ या बदृदुआ नहीं देनी है ।


7. किसी को Good morning, Good afternoon, Good evening, Good night, आदि शब्द नहीं बोलने हैं यदि कोई बोलता है तो उसे समय अनुसार केवल Morning Morning Evening Evening Afternoon व Night Night दो-दो बार बोल दें


8. Happy Birthday, Happy New year, तथा Good bye, आदि शब्द नहीं बोलने हैं यदि कोई आपसे बोलता है तो उसे धन्यवाद या Thank you बोल दे


9. सिक्खों को छोड़कर संत-बाबा रूप में दाढी न हो।


10. बहनों ने नेल पालिस ओर लिपिस्टिक नही लगानी हैं ।


11. परफ्यूम तथा सेंट आदि नहीं लगाना है ।


12. विवाहित बहनें केवल सिन्दूर या बिन्दी में से एक चीज लगा सकती हैं ।


13. किसी अनउपदेशी का झूठा नहीं खाना है यदि अनजान में खाया है तो क्षमा होता हैं । भविष्य में ध्यान रखें ।


14. हाथों पर मेंहदी नहीं लगानी है । किसी बिमारी के कारण लगा सकते है, सिर में लगा सकते हैं । हाथों में मेहंदी लगाने से नाम खण्ड होता है ।


15. शादी में जाते है तो पैसे (शगुन' वारफेरी, मुंह दिखाई पर पैसे) नहीं देने है । विदाई के समय घर में नारियल नहीं फोड़ना है, कन्याविदाई के समय गाडी पर पानी डालना या धवका लगाना आदि सगुन करना मना है ।


16. किसी को किसी भी अवसर पर Gift देना मना है 1 अगर कोई 6111दे तो कोशिश करनी है ना लो 1 अगर कोई पीछे से रख जाऐ या डाक या कोरियर द्वारा भेजे तो उसको रख लें उनके उपलक्ष में कुछ रूपये दान आश्रम में कर दें ।


17. परिवार में किसी की भी शादी हो तो परिवार के अन्य सदस्यों के लिए कपड़े आदि नहीं देने व नहीं लेने हैं । 


18. कन्या दान रूप में कपड़े, गहने आदि नहीं देने हैं। रूपये भी इस उपलक्ष में देने हैं कि आप ने वहां खाना खाया है । और बहन के घर जाते है तो इसी उद्देश्य से पैसे दे सकते हैं कि आपने वहां खाना खाया है या चाय आदि पी है यदि अधिक धन दे दिया तो आप की बहन पर आप का ऋण न हो जाए तथा संस्कार न जुड जाऐं । क्योंकि हम संस्कार वश ही यहां काल जाल में रह जाते हैं । यदि आप पैसा देना चाहें और बहन न लेवे तो दोनों ही भार मुक्त हो जाते हैं । यदि बहन-बुआ जी आदि उपदेशी हैं तो उन को चाहिए कि वह पैसा रूपया-कपड़ा आभूषण कदापि न लें । प्यार से कहें कि आपने कह दिया, हमने मान लिया, ऐसे शिष्टाचार से मना कर दें । 


19. स्कूल में गायत्री मन्त्र बोलते समय ओं३म् शब्द नहीं बोलना है । क्योंकि जिसे गायत्री मंत्र कहते है यह यजुर्वेद कं अध्याय 36 का मंत्र 3 है । मूल पाठ में ओ३म् मन्त्र नहीं है । वेद परमात्मा की अनूठी देन है इसमें वृद्धि या कटौती करना, परमात्मा का अपमान है, लाभ के स्थान पर हानि ही होती है, इस लिए इस मन्त्र के साथ ओउम् नहीं बोलना है । यजुर्वेद के अ. 36 मंत्र 3 अर्थात् कथित "गायत्री मंत्र” मात्र परमात्मा की महिमा का एक मंत्र है । इसे पढने से परमात्मा के गुणों का ज्ञान होता है । जैसे बिजली की महिमा कहीं लिखी हो उसको कविता बनाकर गाते रहने से बिजली के गुणों का ज्ञान है परन्तु बिजली का लाभ नहीं मिल सकता लाभ तो बिजली का कनेक्शन लेने से ही मिलेगा इसी प्रकार यजुर्वेद अध्याय 36 मंत्र 3 जिसको गायत्री मंत्र बताकर जाप करने को कहते हैं वह व्यर्थ है । क्योंकि यह मंत्र तो परमात्मा की महिमा का ज्ञान कराता है । परमेश्वर के गुणों अर्थात् लाभ को बताता है । वह लाभ अधिकारी संत से सत्यनाम व सारनाम की दीक्षा प्राप्त करके अर्थात् कनेक्शन लेकर ही प्राप्त हो सकते हैैं यजुर्वेद अध्याय 36 मंत्र 3 अर्थात् गायत्री मंत्र की आवृर्ति करने से नहीं फिर भी कोई अज्ञानी व्यक्ति विद्यार्थियों को विवश ' करे तो 🕉️ शब्द का उच्चारण न करें केवल गायत्री मंत्र का भुर्भव: स्व: से ही उच्चारण प्रारम्भ करें । "ओ३म" एक अक्षर को न लगाएँ अध्यापकों को चाहिए कि यजुर्वेद अध्याय 36 मंत्र 3 की अपेक्षा सन्त गरीबदास जी महाराज की वाणी से मंगलाचरण विद्यार्थीयों से बुलाए' । गायत्री मंत्र से कई गुणा लाभ होता है परन्तु सत्यनाम बिना सब व्यर्थ है ।

 20. किसी मुर्दे के अंतिम संस्कार में लकड़ी डाल सकते हैं ! कंधे पर या'अन्य साधन द्वारा शव को ले जा सकते हैं !

 21. मुर्दे पर एक से अधिक कफन नहीं डालना है यदि आप से पहले किसी ने कफन डाल रखा हैं तो आप ने कफन नहीं डालना हैं क्योंकि कफन केवल एक ही होता है अगर पहले कफन डाल रखा है फिर किसी ने एक से ज्यादा कफन डाला है तो नाम खण्ड होता है ! 


22. शादी में खाना खा सकते है, लड़के या लड़की की शादी में खाना खाकर आते हैं यह मान कर पैसे दे सकते हैं कि आपने वाहां भोजन खाया हैं ।


23. यदि दोनों पक्ष उपदेशी हैं तो पीलिया देना, छुछक देना बन्द करना है । एक पक्ष अनुपदेशी है तो केवल एक २ जोडी कपड़े केवल जच्चा व बच्चे के देने हैं ।


24. नौकरी पर आॅफिस में जब कोई रिटायर होता है तो आॅफिस में सभी आपस में पैसे इकठ्ठे करके उसे Gift तथा पार्टी देते हैं ऐसा कर सकते हैं । (इसमें थोडा बहुत दे सकते हैं) लेकिन उपदेशी ने कतई नहीं लेना है । 


25. घर में जब बहन आती है तो उसे कपड़े व पैसे नहीं देने हैं । अगर बहन या बेटी अनुपदेशी है तो बहुत कम एक २ जोडी कपडे दे सकते है । बच्चों के लिए खाने पीने का सामान दे सकते हैं और अगर जब बहन के घर जाते हैं तो साथ में बच्चों के लिए फल, मिठाई आदि ले जा सकते हैं । 


26. स्कूल में विदाई पार्टी के समय बच्चे पैसे दे सकते हैं ।

 27. गौशाला में पैसा नहीं, चारा आदि दे सकते हैं । 


28. शादी की मिठाई कोई घर में लेकर आए तो और कुछ शादी के नाम के कार्ड के साथ मिठाई लाते हैं तो हृदय से मना करें । फिर भी कोई रख जाए तो खा सकते हैं उस के बदले में कुछ रूपये आश्रम में दान कर दें । आप पर भार नहीं रहेगा। अगर उपदेशी परिवार शादी में मिटाई बनाए तो वो आई हुई रिश्तेदारी या बहन को मिठाई बांधकर दे सकते है, परन्तु यह मिठाई बनाने की परम्परा ही गलत है सामान्य भोजन बनाऐं जैसे अतिथि का सत्कार करने के लिए बनाते हैं खीर, खाण्ड हल्वा बना सकते हैं । 


29. भगत भाई आपस में उधार सामान एक दूसरे से ले सकते हैं और अगर आपस में एक दूसरे के घर आते जाते हैं तो बच्चों के लिए खाने पीने का सामान ले जा सकते हैं । 


30. भाई या बहन की आर्थिक स्थिति कमजोर हो तो आर्थिक या अन्य मदद उधार रूप में कर सकते हैं । बहन को चाहिए कि उस पैसे को लौटाए जिस से उस पर भार नहीं बनेगा । यदि बहन धन लौटाने में असमर्थ है तो' भाई कभी बहन पर पैसे लौटाने का दबाब न बनाए । 


31. लड़की की शादी में माता पिता अपनी लड़की को एक दो जोड़ी कपड़े दे सकते हैं पैसे नहीं, अगर लड़के की शादी में लड़की वाले बगैर नाम वाले है और वो अगर जबरदस्ती अपनी लड़की को कुछ देना चाहे तो इसी प्रकार लड़की की शादी में लड़के वाले अनउपदेशी कुछ मांग करे तो स्पष्ट मना कर दें बिल्कुल नहीं लेना देना हैं । 


32. जिन लडकियों का विवाह होता है वे जिन कपड़ो को पहन कर विवाह मण्डप अर्थात रमैणी में बैठे उन्हीं कपड़ों में अपनी ससुराल जाऐं । अन्य पोशाक न बदले किन्हीं परिस्थितियों में बदलनी पडें (जैसे मिट्टी लग जाए' गीली हो जाए या अन्य कारण से खराब हो जाए) तो बदल सकतें हैं । अन्यथा नहीं । देखने में आया है कि कुछ बहनें रमैणी में विवाह के समय सामान्य पोषाक पहनती है‘ बाद ने तड़क भड़क वाली पोषाक पहन कर ससुराल जाती है' 

वह मर्यादा के विरूद्ध है । विवाह के समय जैसी भी नई या' पुरानी पोषाक पहन रखी है, उसी को पहन कर ससुराल जाऐ, अन्य या उपरोक्त परिस्थितियों मे' पोषाक बदली जा सकती है । 


33 आपके द्वार पर कोई भिक्षुक आता या कहीं बाजार में आप से कोई भिक्षा माँगता है तो उसे पैसे न दें खाना खिला दें । यदि उसको वस्त्र की आवश्यकता है तो वस्त्र बिना सिला न दें, पुराना या नया सिला हुआ कपड़ा दें ' कम्बल या चादर भी पुराना दें नहीं तो अधिकतर भिक्षुक शराबी कवाबी हैं, नए कपडों को बेचकर शराब आदि नशीली वस्तुओं का प्रयोग करते हैं वह दोष दान करने वाले को भी लगेगा । एक श्रद्धालु ने कहा कि यह अच्छा सा नहीं लगता कि भिक्षुक को रूपये न दें, आत्मा नहीं मानती? उस के लिए उत्तर तथा एक उदाहरण यह है कि एक भद्रपुरूष ने एक भिखारी को 1०० रूपयों की भिक्षा दे दी । पहले वह भिक्षुक पाव शराब पीता था अपनी पत्नी व परिवार को परेशान करता था । उस दिन 100 रूपये प्राप्त होने के कारण उस भिखारी ने आधा बोतल शराब पी ली । शराब के नशे में अपनी पत्नी को पीट डाला । उस भिखारी की पत्नी ने बच्चों समेत आत्महत्या कर लीं । उस जैनटलमैन के सौ रूपये के दान ने एक परिवार को उजाड दिया । इसका दोष दानकर्ता को है । गीता में लिखा है कि कुपात्र को किया दान लाभ के स्थान पर हानि करता है । कबीर परमेश्वर जी कहतें हैं : 


गुरु बिन माला फेरते गुरु बिन देते दान । गुरु बिन दोनों निस्फल हैं, पूछो वेद पुरान । । 


34. किसी भी नियम के खण्डित हो जाने पर आप को परमेश्वर से मिलने वाला लाभ बन्द हो जाएगा। जैसे बिजली का कनैक्शन कट जाने पर सर्व लाभ बन्द हो जाते हैं । जो कार्य बिजली से होने थे वे रूक जाते हैं । इसी प्रकार परमात्मा की शक्ति से जो आपको तथा आपके परिवार को लाभ मिलना था वह रूक जाता है । एक बहन ने बताया कि उसके पति ने दीक्षा भी ले रखी है किसी भी नियम का पालन नहीं करता । इसी प्रकार एक भक्त ने अपनी पत्नी की शिकायत की । उसके विषय में यह जाने कि उनका नाम खण्डित हो चुका है ऐसे व्यक्तियों का कोई भयंकर पाप कर्म है । नाम खपिडत होने पर वह पापकर्म अपना प्रभाव करके हानि करेगा जब तक मर्यादा में रहकर भक्ति करते हैं तो वह पाप कर्म हानि नहीं कर सकता । 


एक बहन ने ऐसे ही नाम खपिडत कर रखा था कुछ वर्षों के पस्चात् उसकी जीभ में केंसर का रोग हो गया उस बहन से पूछा कि क्या अब आपको टीवी. देखना, लिपिस्टीक लगाना अच्छा लगता है? उसने रोते हुए कहा नहीं-नहीं । 


इसी प्रकार परिवार व शरीर में हानी से बचने के लिए तथा परमात्मा से लाभ प्राप्त करके मोक्ष प्राप्ति के लिए मर्यादा में रहे अन्यथा पाप कर्म आपको क्षति कर देगा । 


इसलिए सर्व मुपयात्माओं से पुनः निवेदन है कि सर्व नियमों का विधीवत् पालन करके मानव जीवन को सफल बनाये तथा पूर्ण मोक्ष प्राप्त करके सदा सुखी बने, सतलोक में निवास करें । 


जो विद्यार्थी शिक्षा समय में मौज मरती करते हैं वे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं आजीवन कष्ट उठाते हैं । जो शिक्षा के समय मे मौज मस्ती न करके लगन से शिक्षा पूरी कर जाते है तो उनको विद्यालय में किये प्रयत्न का फल बाहर क्षेत्र में नौकरी द्वारा प्राप्त होता है । इसी प्रकार सर्व मानव परमात्मा प्राप्ति के विद्यालय में विद्यार्थी (भक्त) हैं । जो भक्त मौज मस्ती करते हैं । भक्ति तथा नियमों का पालन न करके अन्य प्राणियों के शरीरों में घोर कष्ट उठायेंगे । जो लगन के साथ मर्यादा में रहकर परमेश्वर कबीर जी की भक्ति साधना जगत गुरु संत रामपाल जी महाराज से प्राप्त करके आजीवन करते रहेंगे उनको सत्यलोक में सर्व सुविधाएँ प्राप्त होगी वहाँ वृद्ध अवस्था नहीं है मृत्यु भी नहीं होती ऐसा ही जीवन है, नर-नारी व परिवार है वह कभी मृत्यु को प्राप्त नहीं होता । इसलिए सत्य भक्ति करके अपना जीवन सफल बनायें । जिस सत्य भक्ती से आपको यहां भी सर्व आवश्यक सुख सुविधायें प्राप्त होंगी तथा पूर्ण मोक्ष भी मिलेगा ।

🙏🙏🙏





सत्य क्या है ❓

 


सत्य_जिसका कभी नाश ना हो
(अविनाशी)
कौन है अविनाशी ? (परमात्मा)
परमात्मा हमारे परमपिता व माता है , तो परमात्मा समर्थ होकर भी हमे दुखी कैसे देख सकता है,हमारे पास क्यों नही आता और हमे लाभ क्यों नही देता ?
उत्तर_ परमात्मा सर्व शक्तिमान हैं पुरे ब्रम्हांड में जीतने भी जीवात्मा है सबको अपने लोक मे अपनी संतान की तरह देवरुप मे रख कर हमेशा के लिए बैठे - बैठे खिला सकता है नील, पदम , संख ,महासंख,जैसे असंख्य जीवात्मायें सभी ब्रम्हांड मे है पहले ये सब परमात्मा के अविनाशी स्थान पर रहा करते थे आत्मायें अपनी गलती के करण परमपिता से दुर हो गये है इसलिए कर्मफल ही मिलता है व दुखी है,
हमारे पास उस परमात्मा को देखने की सक्ती नही है वो इतना ज्यादा तेजोमय प्रकाशयुक्त शक्तीमान है कि अगर जहां वो जैसे रहता है वैसा का वैसा यहाँ आ जाय तो इस पृथ्वी के सरे प्राणी उसे देखना तो दुर सहन नही कर पायेगा,कैसे जैसे_हम सब मे पापकर्म के प्रभाव है हम सब आसुरी प्रवृत्ति के हो गये हैं
बुरे लोग अच्छे लोगों को देख कर खुश नही है राक्षस देवताओ को देखकर खुश नही है ठिक इसी तरह हम उस परमात्मा के तेज को सहन नही कर पायेंगे इसलिए परमात्मा अपने रूपको अन्य रूप में रूपांतरित करके आता है क्यों आता है ? हमे इस नर्क से हमेशा के लिये पापमुक्त व पवित्र करके अपने स्थान पर ले जाने के लिये जहां हर चीज अविनाशी नुरतत्व का है ये सब मुझे कैसे पता चला तो मै बता दुं 
भगवान पृथ्वी पर आया किसी पुण्यात्मा को अपने बारे मे बताया उसे अपना लोक स्थान दिखाया अपना गवाह बनाया अपने पाने वहाँ जाने की वीधी बताई सब ज्ञान समझाया याददाश्त व भविष्य के लोगों के लिये सब ज्ञान एक ग्रंथ में जिसे सतग्रंथ साहेब कहते हैं लिख दी अब उस ज्ञान को समझाकर जन जन तक पहुचाने के लिये उस परमात्मा ने गुरु रूप मे स्वयं भी आ सकता है और अपना प्रतिनिधी भी नियुक्ति कर सकता है यहां से पता चला मेरे को,
🙏🏻सत् साहेब जी 🙏🏻🙇🏼🌴🥀🌷🌻💐🏵🌼💞💞

क्या यह वेद गीता कुरान बाइबल गुरु ग्रंथ सच है या झूठ

 

सत साहेब जी परमात्मा की प्यारी आत्मा 🙏🏻🌺🌺🌺

आपका कहना सत्य है, संत रामपाल जी के अलावा बांकी अधर्म गुरु जहां से अपना मतलब निकलता है वहीं से पढ़ाते हैं,सभी शास्त्र अथाह जंगल की तरह है जिसमें तरह तरह के औषधिय पेढ़ पौधे होते हैं वैद ही उसमे से हमारे रोग की दवा चुन कर पीने योग्य तैयार कर सकता है संत रामपाल जी महराज कबीरपरमात्मा के दिये ज्ञान को सभी शात्र से मीलान करते हैं जो बहुत सरे तथ्य कबीर ज्ञान का समर्थन करते हैं, 

कबीर साहेब जी ने कहा है बेद कतेब झूठे ना नही भाई झूठे है जो समझे नाही

 चारों वेद गीता कुरान बाइबल गुरु ग्रंथ यह शास्त्र झूठे नहीं है इनमें परमात्मा के विषय में जानकारी दी हुई है लेकिन पाने की विधि काल ब्रह्म तक ही है पूर्णब्रह्म को पाने की संपूर्ण साधना विधि जानकारी पांचवां वेद सूक्ष्म वेद में है, इसलिए यह सभी शास्त्र सत्य तो है पर अधूरा ज्ञान रखते हैं,

👉 आपका सवाल है क्या यह वेद गीता कुरान बाइबल गुरु ग्रंथ सच है या झूठ

उत्तर_ ये पाँचो शास्त्र सत्य हैं ! और जो इन शास्त्र में त्रुटि है वो भी सत्य है आप पहले ये सवाल करें की इन सभी शास्त्र की उत्पत्ति कैसे हुई, या इस सृष्टि की उत्पत्ति कैसे हुई ? क्योंकि जब तक आप सुरुवात का मुल जड़ का पता नही लगा लेती तब तक यह अध्यात्म ज्ञान नही सुलझेगा क्योंकि सृष्टि रचना इस ज्ञान गुत्थी को खोलने की चाबी है,

आपको इन कुरान बाईबल गुरुग्रंथ जैनग्रंथ की उत्पति बताता हूँ, फिर आपका सवाल सुलझ जायेगा आप इस बुक कबीर सागर सरलार्थ को इंस्टॉल करें फिर भाग 5 पर जायें पृष्ट 386 अध्याय "जैन धर्म बोध" का सारांश यहां से ॠषभदेव व महावीर जैन, बाबा आदम कुरान बाईबल उत्पत्ति के बारे में जानेंगे आपको चार पृष्ट पढ़ना है "389 पृष्ट" तक फिर "252 पृष्ट " अध्याय मोहम्मद बोध का सारांश ( मुसलमान धर्म की जानकारी ) "279 पृष्ट" तक मुस्लिम और ईसाई धर्म की जानकारी पढ़ेंगे इतना पढ़ने से आप इन तीन धर्म जैन मुस्लिम ईसाई धर्म की उत्पत्ति व शास्त्रों की रचना व इनके रचयिता को जानेंगे फिर निर्णय होगा ये शास्त्र सत्य हैं या नहीं

#वह_अजीब_स्त्री


 #वह_अजीब_स्त्री 


लोग बताते हैं कि  जवानी में वह बहुत सुन्दर  स्त्री थी। हर कोई पा लेने की जिद के साथ उसके पीछे लगा था। लेकिन शादी उसने एक बहुत साधारण इंसान से की जिसका ना धर्म मेल खाता था, ना कल्चर, वह सुन्दर भी खास नहीं था और कमाता भी खास नहीं था। बहुत बड़े, रसूखदार और अच्छी पोजीशन वाले अनगिनत रिश्ते उसके पास आये, अनगिनत प्रेम निवेदन उसके पास आये लेकिन उसने जिसे जीवन साथी  चुना वह इन सबमें कमतर था


लोग उस स्त्री के बारे में सुनते, सामाजिकता में पगे, रटे-रटाये वाक्य दोहरा देते, जैसे कि "बहुत सुन्दर स्त्री की अक्ल घुटने में होती है",  "नखरे निकल जाने के बाद  ऐसे ही मिलते हैं",  "ज्यादा भाव खाने वालो को कोई भाव नहीं देता"आदि।


उस स्त्री को ऐसे किसी बीज वाक्य से सरोकार नहीं था, वह अपनी पसंद के जीवन साथी के साथ खुश थी, सुखी थी।


उसकी कहानी एक पत्रकार ने सुनी, उसे उसकी कहानी में कई रंग नजर आये। वह उस स्त्री के पास गया। पत्रकार उसकी सुंदरता देखकर दंग था। आज भी वह बेहद सुन्दर और जहीन थी।


पत्रकार ने विनम्रता से उस स्त्री को साक्षात्कार के लिए निवेदन किया। स्त्री जोर से ठहाका लगाकर हंसी, बोली "मेरा इंटरव्यू पूरा करने से पहले  या तो तुम बीच में भाग जाओगे, या फिर अपनी पारम्परिक सोच को मिक्स करके अपनी ही कहानी पेल दोगे, इसलिए मैं कोई इंटरव्यू देने की इच्छुक नहीं हूँ। आप चाय पीजिये, रुखसत लीजिये।"


पत्रकार के जीवन का ऐसा पहला वाकया था जब एक ही वाक्य में उसका खुद का इंटरव्यू हो लिया था। वह सम्भला  और जैसे तैसे उसने इंटरव्यू के लिए उस जहीन स्त्री को राजी कर लिया । 


पत्रकार ने  पूछा, "आप बेहद सुंदर हैं, बहुत स्त्रियों को आपकी सुंदरता पर रश्क होता है। आप इसे कैसे लेती हैं।"


स्त्री ने पत्रकार को देखे बिना बाल झटकते हुए जवाब दिया, "बकवास  सवाल, मेरे सुंदर होने में मेरा कोई योगदान नही, कुदरत ने  मुझे दिया, इसे मेरी उपलब्धि ना कहें। अगर मैं इतराती हूँ तो मेरा इतराना गैर वाजिब है। दैहिक सुंदरता पूर्ण सुंदर होना नही।"


पत्रकार असहज हुआ, दूसरा सवाल किया,


"आप ने कभी कोई सौंदर्य प्रतियोगिता में भाग क्यो नही लिया। आप विश्व की कोई भी प्रतियोगिता जीत सकती थी।'


स्त्री ने इस बार पत्रकार की नजरों में नजरें डाल दी। पत्रकार उसके तेज का सामना नही कर पाया, उसने नजरें झुका ली। 

स्त्री बोली- "सुंदरता में प्रतियोगिता कैसी। सब अपने अपने हिसाब से सुंदर हैं। गोरी चमड़ी सुंदर क्यो है। बहती नदी को देखिए कभी। जहाँ जहाँ वह गहरी है वहाँ वहाँ सांवली हो जाती है। किसी से सुंदरता की प्रतियोगिता जीत कर आप सुंदरता के मानदण्ड स्थापित करना चाहते हैं? सुंदर लोग आपने देखे नही। मेरी झुर्रियों वाली दादी मेरी नजर में सबसे सुंदर महिला है, आपकी माँ आपकी नजर में सबसे सुंदर हो सकती है। आपकी अपनी पत्नी अपने पिता की नजर में सबसे सुंदर होगी। आपकी बहन किसी को दुनिया की सर्वश्रेस्ठ सुन्दरी लग सकती है। गुलाब सुंदर या चमेली ये वाहियात प्रतियोगिता है। आगे पूछिये।"


"जी,

आप के संबंध बडे औऱ रसूखदार लोगों से रहे, फ़िल्म के हीरो भी लट्टू थे आप पर, ऐसा सुना है, फिर शादी आपने एक बहुत ही साधारण इंसान से की। साधारण मतलब लो प्रोफाइल, वैसे तो आपने चुना है तो असाधारण भी हो सकते हैं। क्या कहेंगी आप।"


"देखिये पत्रकार महोदय, मैं इंटरव्यू इसलिए नही देती क्योंकि आपके तथाकथित सभ्य समाज मे मैं किसी का आदर्श नही हूँ। स्त्रियां मुझे फॉलो नही कर सकती। उनकी सामाजिक स्थिति ऐसी नही है  कि वे खुद पर प्रयोग कर सकें। मैंने खुद पर प्रयोग किये और सुंदर, रसूखदार लोगो से मोहभंग होने के बाद मैंने एक असाधारण पुरूष जिसे आप साधारण कहते हैं को अपना जीवन साथी बनाया। मेरी कहानी किसी के काम नही आएगी इसलिए मैं अपनी कहानी जीना चाहती हूं,  बांटना नही। "


स्त्री के सहज चेहरे पर  वितृष्णा फैलने लगी। वह खामोश हो गई। उसने पत्रकार को चाय दी औऱ ख़ुद भी चाय के घूँट भीतर उतारने लगी। 


पत्रकार को लगा यह स्त्री  इंटरव्यू के बीच में से उठ जाएगी लेकिन स्त्री ने एक क्षण रहस्यमयी चुप्पी साधे रखी । पत्रकार चुपचाप उस अजीब स्त्री को देखता रहा, चाय के एक-एक घूँट के साथ उसकी वितृष्णा कम होती गयी। जल्द सहज होते हुए वह बोली, "सॉरी",  फिर उसने एक अजीब सी स्माइल दी।


"जिन लोगो को आप रसूखदार कह रहे हैं दरअसल वे रसूखदार नही होते। ये रसूखदार आदमी तमाम सृष्टि का उपभोग कर लेने की वृत्ति के साथ ऊपर तक भरे हैं। उन्हे जिंदगी में सब संगमरमर का चाहिए खुद वे बेशक उबड़ खाबड़  खुरदुरा पत्थर  हों। 

आप हैरान होंगे कि तमाम रसूखदार लोगो की चाह मैं नही थी। मेरा जिस्म थी। मुझे पुरुष की वृत्ती मालूम थी। पुरुष ने जिस्म मांगा, मैंने दिया, मैंने वही तो दिया जो उसने मांगा। लेकिन जिस्म भोगने के बाद मैं चरित्रहीन थी, वह चरित्रवान।

मुझे पुरूष की रमझ समझ आ गयी थी। मुझे याद नही कि कितने पुरूष थे । लेकिन जितने थे  सब मेरी देह से प्रेम करने वाले थे, और सब ही मुझे चरित्र का प्रमाण पत्र देकर गए। मुझे हैरानी हुई कि किसी को मैं देह और चरित्र से आगे नजर ही नही आई। मैंने एक अंग्रेजी फ़िल्म देखी जिसका एक संवाद मेरे जेहन में अटका रहा कि प्रेम के वहम में ज्यादा दिन अटके मत रहो। पहले सेक्स करो फिर प्रेम। मुझे हैरानी हुई कि कि प्रेम के लंबे चौड़े दावे करने वाले पुरूष सेक्स के बाद भागते नजर आए। वे मुझे अफ़्फोर्ड नही कर सकते थे शायद, अमीर थे जबकि। अफ़्फोर्ड करना समझते हैं ना आप। स्त्री को अफ़्फोर्ड करना हर पुरूष के वश का नही। तमाम पुरुषो के घर मे जो स्त्री है ना वह स्त्री नहीं है, स्त्री की चलती फिरती लाश हैं। जिंदा स्त्री अफ़्फोर्ड करना इस मुल्क के पुरूषों के लिए लगभग असंभव है।पति का तो अर्थ ही मालिक है। मालिक या तो गुलाम रखते है या वस्तुएं। पुरुष क्या ये मुल्क ही जिंदा स्त्री को अफ़्फोर्ड नही कर सकता। पूरे मुल्क की चेतना में ही पितृसत्ता भरी है।"


पत्रकार ने रीढ़ सीधी कर ली। 


वह आगे बोली, "एक दिन एक असाधारण पुरूष मेरी जिंदगी में आया। जब एक रसूखदार पुरूष मुझे  अचेतन अवस्था में अपनी बड़ी सी गाड़ी से फेंक कर जाता रहा। 

वह असाधारण पुरुष मुझे नहीं जानता था, मेरा जिस्म लहूलुहान था, उसने मुझे उठाया और हॉस्पिटल की ओर दौड़ पड़ा। मेरा मेडिकल हुआ जिसमें रेप की पुष्टि हुई, मेरे चेतना में आने तक वह पुलिस यातना झेल चुका था, उसका बचना मेरे बयान पर टिका था। मैं चेतना में जब आयी तो देखा कि मेरा पूरा जिस्म पट्टियों में जकड़ा है। मुझे बताया गया कि पुलिस ने उसे ही उठा लिया है जो मुझे गोद मे उठाकर यहां लाया, अपनी रिंग और गले की चेन डॉक्टर के पास रख गया कि मैं नही लौटूँ तो इसे बेचकर बिल चुका देना। उसी रिंग और चेन से पुलिस का शक और गहरा हुआ कि यह इन्वॉल्व हो सकता है। 


मैंने किसी के खिलाफ शिकायत नही लिखवाई। वह असाधारण पुरूष लौट आया, उसने मुझे देखा, मैं तो टूटी-फूटी पट्टियों में बंधी थी। लेकिन उस पुरूष का वह देखना अद्भुत था। हजारो खा जाने वाली नजरो से अलग कोई नजर थी जो भीतर तक उतरती चली गयी। उसने मेरे हाथ पर अपना हाथ रखा, उसका स्पर्श अद्भुत था, वह पुलिस थाने से लौटा था लेकिन उसने अपनी व्यथा नही गाई, वह धीरे से बोल पाया, ठीक हो?। मेरी आँखें स्वतः बन्द हो गयी। कोई भी संवाद इतना मर्मान्तक नही था आजतक जितना कि ये। मेरी आंख से आंसू टपक पड़ा। मैं भी होले से कह पाई , ठीक हूँ । शुक्रिया मुझे बचाने के लिए।


 उसने अपनी उंगली के पोर से मेरी आँख का आँसू उठाया औऱ आसमान में उड़ा दिया। मेरे होते मन नही भरना, मैं हूं ना। आजतक इतना बड़ा आश्वासन भी कभी नही मिला था कि मैं हूँ। मन छोटा नही करना। 

उसने मुझे सहारा देकर लिटाया, पूछा, आपके घर मेसेज कर दूं , आपका कोई  पता नही मिला हमे। मैंने कहा मेरे घर कोई नही है, मैं अकेली हूँ। जबकि सब हैं लेकिन मेरी प्रयोग धर्मिता से डरे हुए। मैं उन्हें इत्तलाह नही करना चाहती थी। वह असाधारण पुरुष बोला, मेरे घर मेरी छोटी बहन है। आप मेरे घर चलना स्वास्थ्य लाभ के लिए।


मैंने पूछा उससे,मेरी मेडिकल रिपोर्ट पढ़ी आपने। वह थोड़ा रुंआसा हुआ, बोला हां पढ़ी, आपने उन्हें छोड़ क्यो दिया, रिपोर्ट करते उनके खिलाफ। 

मुझे दर्द था तेज, मैंने कहा। मैं निबट लूँगी उनसे ।


उस पुरूष ने अगला सवाल नही किया। बोला आराम कीजिये। ठीक हो जाइए पहले फिर निबट लेना। मुझे लगा यह मध्यम वर्गीय परिवार का साधारण पुरूष चरित्र प्रमाण पत्र दे ना दे लेकिन जेहन मे जरूर तैयार कर लिया होगा। बडी सोसाइटी भी जब वहीँ अटकी है तो यहां तो चरित्र बडा फसाद होगा। हॉस्पिटल का बिल मैं भर सकती थी लेकिन मैंने नही भरा। उसकी रिंग और चेन बिक गईं । वह मुझे अपने घर लिवा लाया। एक साफ सुथरा साधारण घर था वह। करीने से सजे घर मे मेरी नजर एक बड़ी अलमारी पर पड़ी जिसमे अनेकों किताबें थी। पता चला कि वह साधारण पुरूष दरअसल साधरण नही हैं। उसकी अलमारी में एक से एक बेहतरीन किताब रखी थी। मालूम हुआ वह नास्तिक है। आज तक जितने पुरूष मिले वे सब आस्तिक थे। कोई गले में लॉकेट डाले था कोई उंगली में नग पहने  कोई माथे पर तिलक लगाए। इस मे जो था सब अपना था, दिखावा नही था रत्ती भर भी।   उसने मेरे आराम का प्रबंध किया। मेरे पास बैठा रहा घण्टो। मेरी पसंद की उसके पास बहुत किताबें थी लेकिन अद्भुत यह था कि उसकी अलमारी मे वह किताब भी थी जिस पर बनी फ़िल्म मेरे जेहन में थी। उस किताब में उसने कुछ वाक्य अंडरलाइन किये हुए थे कि स्त्री  प्रेम पाने के लिए सेक्स करती है पुरूष सेक्स पाने के लिए प्रेम लुटाता है। मेरी पूरी जिंदगी इसी एक वाक्य में बंधी थी। 

एक दूसरा वाक्य जो मेरे जेहन में अटका था कि प्रेम के भरम में अटके मत रहो, पहले सेक्स करो फिर प्रेम करो। पढ़ने वाले ने उस वाक्य के नीचे लिख दिया था कि ऐसी स्त्री इस मुल्क में नही मिलती लेखक महोदय। मुझे हंसी आ गयी। मैं हूं ना, मैंने खुद को आईने में देखा। मैं तो बची ही नही थी, जिस देह को मैं मैं समझती थी वह तो जगह जगह से चोटिल थी लेकिन भीतर जो कोई और आकार ले रहा था वह मैं थी। मेरा पुनर्जन्म हो रहा था। मैं अब सिर्फ उस पुरूष को पढ़ती। एक साल मैं उसके घर रही। एक साल उसने मेरी देह को नही छुआ। हाथ पकड़ कर बहुत बार उसने चूमा, माथा चूमा लेकिन वह एक आत्मीय स्पर्श था। 


एक दिन मैंने उसकी रिंग और गले की चैन उसे लौटा दी। वह हैरान हुआ लेकिन मैंने उसे बता दिया कि इसे बिकने नही दे सकती थी। अपने पास रखना चाहती थी सहेज कर। कि जब भी महंगे  गहने पहनने होंगे तो इन्हे पहनूँगी। बिल के पैसे देकर जाती लेकिन इस गहने से बड़ा गहना मुझे मिल गया है तो यह गहना लौटा रही हूं । उसे मैंने मेरा इतिहास बताया, मेरे अफेयर बताये। बताया कि मैं देह के तमाम प्रयोग करके आज जहां अटकी हूँ वहाँ देह कहीं है ही नही । वह वो किताब उठाकर लाया। उसने अपने हाथ से लिखी एक और पंक्ति दिखाई कि ऐसी कोई स्त्री मिली तो मैं उसके समक्ष विवाह प्रस्ताव अवश्य रखूँगा। उसने पूछा मुझसे। शादी करोगी? उसके पास लिव इन का ऑप्शन भी था। एक साल में पास पड़ोस कितनी बातें करता था लेकिन उसने कभी कान नही धरा। वह परम्परावादी आधुनिक इन्सान था।  जो अब तक मिले वे आधुनिकता के छदम भेष में परंपरा वादी थे, जो लिव इन मे रहना चाहते थे ।अनगिनत  प्रस्तावों के बाद यह प्रस्ताव मुझे भीतर तक भिगो गया। सच मे, एक असाधारण आदमी साधारण भेष में ढका था। मैं किस्मत वाली रही कि वह मुझे मिल गया।  


स्त्री के चेहरे पर गहरा संतोष पसर आया था। कोई अलौकिक तेज उसके चेहरे पर दीप्त होने लगा था। पत्रकार ने आज उस अजीब स्त्री में स्त्री घमासान के नए पक्ष चिन्हित किये।...........

सोच


#वेषभूषा_ओर_पहनावे_में_अंतर👇

"#वेशभूषा" और "#पहनावे" से कुछ नहीं होता!
एक दिन मोहल्ले में किसी ख़ास अवसर पर महिला सभा का आयोजन किया गया, सभा स्थल पर महिलाओं की संख्या अधिक और पुरुषों की कम थी। मंच पर तकरीबन पच्चीस वर्षीय खुबसूरत युवती, आधुनिक वस्त्रों से सुसज्जित, माइक थामें कोस रही थी पुरुष समाज को।

वही पुराना आलाप.... कम और #छोटे_कपड़ों_को_जायज, और कुछ भी पहनने की स्वतंत्रता का बचाव करते हुए, पुरुषों की गन्दी सोच और खोटी नीयत का दोष बतला रही थी।

तभी अचानक सभा स्थल से... तीस बत्तीस वर्षीय सभ्य, शालीन और आकर्षक से दिखते नवयुवक ने खड़े होकर अपने विचार व्यक्त करने की अनुमति मांगी। अनुमति स्वीकार कर अनुरोध माइक उसके हाथों मे सौप दिया गया .... हाथों में माइक आते ही उसने बोलना शुरु किया....

"माताओं, बहनों और भाइयों, मैं आप सबको नही जानता और आप सभी मुझे नहीं जानते कि आखिर मैं कैसा इंसान हूं? लेकिन पहनावे और शक्ल सूरत से मैं आपको कैसा लगता हूँ बदमाश या शरीफ?"

सभास्थल से कई आवाजें गूंज उठीं... पहनावे और बातचीत से तो आप शरीफ लग रहे हो... शरीफ लग रहे हो... शरीफ लग रहे हो....

बस यहि सुनकर, अचानक ही उसने अजीबोगरीब हरकत कर डाली... सिर्फ हाफ पैंट टाइप की अपनी अंडरवियर छोड़ कर के बांकि सारे कपड़े मंच पर ही उतार दिये। ये देख कर .... पूरा सभा स्थल आक्रोश से गूंज उठा, मारो मारो गुंडा है, बदमाश है, बेशर्म है, शर्म नाम की चीज नहीं है इसमें.... मां बहन का लिहाज नहीं है इसको, नीच इंसान है, ये छोड़ना मत इसको....

ये आक्रोशित शोर सुनकर... अचानक वो माइक पर गरज उठा... 

"रुको... पहले मेरी बात सुन लो, फिर मार भी लेना चाहे तो जिंदा जला भी देना मुझको। अभी अभी तो....ये बहन जी कम कपड़े , तंग और बदन नुमाया छोटे छोटे कपड़ों की पक्ष के साथ साथ स्वतंत्रता की दुहाई देकर गुहार लगाकर...

"नीयत और सोच में खोट" बतला रही थी... तब तो आप सभी तालियां बजा-बजाकर सहमति जतला रहे थे। फिर मैंने क्या किया है? सिर्फ कपड़ों की स्वतंत्रता ही तो दिखलायी है।
"नीयत और सोच" की खोट तो नहीं ना और फिर मैने तो, आप लोगों को... मां बहन और भाई भी कहकर ही संबोधित किया था। फिर मेरे अर्द्ध नग्न होते ही.... आप में से किसी को भी मुझमें "भाई और बेटा" क्यों नहीं नजर आया?? मेरी नीयत में आप लोगों को खोट कैसे नजर आ गया? मुझमें आपको सिर्फ "मर्द" ही क्यों नजर आया? भाई, बेटा, दोस्त क्यों नहीं नजर आया? आप में से तो किसी की "सोच और नीयत" भी खोटी नहीं थी... फिर ऐसा क्यों?? "

सच तो यही है कि..... झूठ बोलते हैं लोग कि... 
"वेशभूषा" और "पहनावे" से कोई फर्क नहीं पड़ता

हकीकत तो यही है कि मानवीय स्वभाव है कि किसी को सरेआम बिना "आवरण" के देखे लें तो कामुकता जागती है मन में...
रूप, रस, शब्द, गन्ध, स्पर्श ये बहुत प्रभावशाली कारक हैं इनके प्रभाव से विस्वामित्र जैसे मुनि के मस्तिष्क में विकार पैदा हो गया था। जबकि उन्हें सिर्फ रूप कारक के दर्शन किये! आम मनुष्यों की विसात कहाँ।

दुर्गा शप्तशती के देव्या कवच में श्लोक 38 में भगवती से इन्हीं कारकों से रक्षा करने की प्रार्थना की गई।
#रसे_रुपे_च_गन्धे_च_शब्दे_स्पर्शे_च_योगिनी।
#सत्त्वं_रजस्तमश्चैव_रक्षेन्नारायणी_सदा।।
रस रूप गंध शब्द स्पर्श इन विषयों का अनुभव करते समय योगिनी देवी रक्षा करें तथा सत्वगुण, रजोगुण, तमोगुण की रक्षा नारायणी देवी करें।

अब बताइए, हम #भारतीय #हिन्दु महिलाओं को "हिन्दु #संस्कार" में रहने को समझाएं तो स्त्रियों की कौन-सी "#स्वतंत्रता" छीन रहे हैं???

संभालिए अपने आप और #समाज को, क्योंकि भारतीय समाज और संस्कृति का आधार #नारीशक्ति है और धर्म विरोधी, अधर्मी, चांडाल (बॉलीवुड, वामपंथी, इसे मिशनरी) ये हमारे समाज के आधार को तोड़ने का षड्यंत्र कर रहे हैं ।

#नारी_तू_नारायणी
 

Dharm

 नन बनते समय लडकियाँ क्या शपथ लेती हैं ?🤔     जनवरी में मैं गोवा गया था... तो शौंक़िया तौर पर मैं वहाँ कि एक प्रसिद्ध चर्च भी चला गया था..!...