गुरुवार, 17 दिसंबर 2020

नियम

 🙏🔥गुरु दीक्षा लेने से पहले आवश्यक नियम जिनका आपने अतिम स्वास तक पालन करना हैं🙏

 1.  हुक्का शराब , मांस , तम्बाकू , बीयर, सिगरेट, हुलांस सुंघना , अण्डा , सुल्फा , अफीम, गांजा और अन्य नशीली वस्तुओं का सेवन तो दूर रहा किसी को नशीली वस्तु ला कर भी नहीं देनी हैं । क्योंकि बुराई करना व उसमें सहयोग देना दोनो ही महापाप हैं और भक्ति मार्ग भे विष के समान है।

2.  किसी प्रकार का कोई व्रत , तीर्थ , गंगा स्नान आदि नहीं करना तथा किसी अन्य धार्मिक स्थल पर स्नानार्थ , या दर्शनार्थ नहीं जाना है। किसी मन्दिर में पूजा व भक्ति के भाव से नहीं जाना कि इस मन्दिर में भगवान है । भगवान कोई पशु तो नहीं की उसको पुजारी जी ने मन्दिर में बांध रखा हैं। भगवान तो कण-कण में व्यापक है। उसके गुणों का लाभ लेने के लिए प्रथम गुरू बनाइए । नाम लेकर सुमिरण करो । तब आपको ईश्वरीय लाभ प्राप्त होगा । कबीर साहेब कहते हैं :कबीर पर्वत-पर्वत मैं फिरा , कारण अपने राम । राम सरीखे जन मिले , जिन सारे सब काम ।। 


3.  यदि किसी की मौत हो जाती हैं तो उसके फूल आदि कुछ नहीं उठाने हैं, ना पिण्ड भरवाने हैं, ना तेराहमी , छ:माही , बरसोदी, पित्र-पुजा , कोई भी समाधि पूजना , श्राद्ध निकालना आदि कुछ नहीं करना हैं । यह पांच तत्व से बना शरीर तो एक वस्त्र की तरह हैं । मूल वस्तु जीवात्मा है। वह कर्म आधार पर नए शरीर में जा चुकी होती हैं । हम अज्ञानियों द्वारा भ्रमित होकर पीछे क्रियाएँ कारते रहते हैं,जो व्यर्थ है । गरीबदास जी महाराज कहते हैैं,

 देह पड़ी तो क्या हुआ, झूठी सभी पटीटा।पक्षी उड़ा आकाश कूं, चलता कर गया बीट।


4. अन्य किसी देवी-देवता की पुजा नहीं करनी हैं कबीर साहेब कहते हैं … माई मसानी सेढ़ शीतला भैरव भूत हनुमत । पत्मात्मा उनसे दूर है, जो इनको पुजंत ।। 


।। कबीर, देवी-'देव ठाढे़ भये , हमको ठौर बताओ । जो मुझ (कबीर) को पुजें नहीं , उनको लूटो खाओ । 


कबीर , सौ वर्ष सतगुरू पूजा , एक दिन आन उपासी। वो अपराधी आत्मा पड़े काल की फांसी । 


5. ऐसे व्यक्ति का झूठा नहीं खाना , जो नशीले पदार्थों का सेवन करता हो।

6. जुआ,ताश कभी नहीं खेलना हैं।

7. किसी प्रकार के खुशी के अवसर पर नाचना व अश्लील गाने गाना सख्त मना हैं।

8. अपने गुरू देव जी की आज्ञा के बिना घर में किसी प्रकार का यज्ञ हवन, धार्मिक अनुष्ठान नहीं करवाना है बन्दीछोड़ अपनी वाणी मे कहते हैं 

: - गुरू बिन यज्ञ हवन जो करही मिथ्या जाय कबहु नहीं फलहीं। गुरू बीन होम यज्ञ जो साधै, ओरो दस मन पातक लागे।।

9. छुआछात नहीं करना हैं। हम सब एक मालिक के बन्दे हैं। भगवान ने किसी भी जाति या मजहब (धर्म) के स्त्री पुरूषों में कोई अन्तर नहीं किया तो हम क्यों करें ? 

10 . दहेज लेना व देना कुरीति हैं तथा मानव मात्र की अशांति का कारण है। उपदेशी के लिए मना है। जिसने अपने कलेजे की कौर पुत्री को दे दिया फिर बाकीं क्या रहा ? "आपसे आवै रत्न बराबर,  मांगा आवै लोहा "


11. वास्तुकला या ज्योतिष आदि के चक्र में नहीं पड़ना है प्रभु पर विश्वास रखें । 

👉उपरोक्त नियमों में से किसी भी नियम का उल्लंघन कर दिया तो आप नाम रहित हो जाओगे । 🙏🙏

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Dharm

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