🙏धर्म कहता है_ यदि अधर्म का साथ कर्तव्य समझकर या विवश होकर भी दिया जाय तो भी वो अधर्म ही होता है और उसका साथ देने वाला भी दण्ड का अधिकारी होता है क्योंकि धर्म हर कर्तव्य से बड़ा और सर्वोपरि होता है धर्म
👉धर्म क्या है ? _ भगवान का सविधान ही धर्म है
धर्म किसी एक या अधिक परलौकिक शक्ति में विश्वास और इसके साथ-साथ उसके साथ जुड़ी रीति, रिवाज, परम्परा, पूजा-पद्धति और दर्शन का समूह ही
और, ज्ञान, विवेक, सत्य, संतोष, प्रेम भाव, धीरज, निरदोषा( धोखा रहित), दया, क्षमा, शील, निष्कर्मा, त्याग, बैराग, शांति निजधर्मा, भक्ति कर निज जीव उबारे, समानता (मित्र सम सबको चित धारै इन गुणो का आचरण करना ही धर्म है सभी बुराइयों का त्याग करना ही धर्म है सत भक्ति करके आत्म कल्याण कराना ही धर्म है, मनुष्य का इनसानियत मानवता ही धर्म है, दया धर्म का मूल है पाप मूल अभिमान
आज पुरे विश्व में अनेक प्रकार के धर्म को मानने वाले मानव है, लेकिन वे अपने आपको धार्मिक मानते हैं लेकिन उनके अंदर धार्मिक्ता नहीं होती हैं,धार्मिक्ता में बदले की भावना, ज्ञान का जवाब हिंसा से,अपने धर्म या अपने पूज्य के अपमान का उत्तर हिंसा से देना ये सब अधर्म है,अपने दुश्मन को भी छमा कर देना धर्म है,
आज लोग धर्म के नाम पर लोगों को गुमराह कर रहे हैं, कोई भी धर्म अपनी रक्षा के लिए हिंसा नहीं सिखाता, हर धर्म के प्रमुख लोग अपने अपने धर्म व इष्टदेव और धार्मिक क्रियाओं को सभी से सर्वश्रेष्ठ मानते व बताते हैं, अब आम जन साधारण किसको सहीं माने ना तो इन्हें सास्त्रों का ज्ञान ना भगवान का परिचय क्योंकि, संत गुरु ज्ञानी लोग एक दूसरे के ज्ञान का खंडन कर रहे हैं एक शास्त्र दूसरे शास्त्र को काट रहा है नानाप्रकार के शास्त्र है मत है अनुभव है गुरुओं, बाबाओं, ज्ञानीयों की कमी नही है कहाँ जायें किसको सहीं किसको गलत माने मानव जीवन अनमोल है गलत राह चले गये तो जीवन बर्बाद हो जायेंगा और लोगों के आस्था के साथ खिलवाड़ करके नकली धर्मगुरु हमें आपस में लड़वा रहें हैं,अरबो लोगों के जीवन बर्बाद करने से बेहतर कुछ नकली धर्मगुरु का जीवन दांव पर लग जाए, क्योंकि ऑल सृष्टि पर सिर्फ एक ही भगवान हो सकता है और सब का एक ही धर्म होना चाहिए और एक ही ज्ञान और एक ही गुरू और सब का एक ही भक्ति मार्ग होना चाहिए ताकि आपसी मतभेद ना रहे,और ऐसा ही है, लेकिन हम सब उस एक को पहचान नही पा रहे हैं,अब पहचान कैसे हो ? पहचान करने के सभी के अलग - अलग तरिके हो सकते है,मै अपनी कहता हूँ __ ज्ञानचर्चा में तो काबू नही आ रहे है लोग तर्क वितर्क करके निकल जाते हैं, हिरे की परख कैसे हो अगर भगवान सच्चाई की तरफ है तो सच्चाई का साथ जरूर देगा, एक कार्यक्रम रखा जाय और लाईव देखे दुनिया, दुनिया के सभी संतो धर्मप्रमुख गुरुओं को बुलाकर ये सर्त रखी जाय क्या ?
1⃣किसी मरणासन्न अवस्था रोगी को तुरन्त ठीक करे
2⃣मरे हुए व्यक्ति को जीवित करे
3⃣अपनी जान को खुद बचाय
इससे नकलीयों को सजा मिलेगा जो भी अपने आप को सर्वश्रेष्ठ बताते है सभी को आमन्त्रित किया जाय
और उनसे पुछा जाय क्या तुम सही भक्ति मार्ग बाता रहे हो अपने अनुयाईयो को क्या तुम भगवान से पुर्ण परिचित हो क्या तुम पुर्ण मोक्ष दे पाओगे अपने शिष्यो को ,क्या तुम सच्चा गुरु संत हो अगर हो तो तुम बांकी नकलीयों का बडे जोर सोर से विरोध क्यों नहीं करते क्योंकि सच्चा कोई एक ही हो सकता है ।।
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