उपदेश प्राप्त पुश्यात्माएँ परमात्मा कें मार्ग पा चलतीं हैं । वह परमात्मा प्राप्ति के लिए यात्रा प्रारंभ करती है । यात्री बहुत ही कम सामान लेकर यात्रा करता है । अधिक भार उठा कर यात्रा करना संभव नहीं होता । जो सांसारिक परम्पराऐ हैं, वे व्यर्थ का भार है जो भक्तिमार्ग में यात्रा करने में बाधक हैं ! इसलिए इस भार से मुक्त होने के लिए निम्न नियमों का पालन करना अनिवार्य है .
१. किसी के पैर नहीं छूने हैं और ना ही दूसरे को छूने देना है यदि अचानक या मना करने पर भी पैर छू लेता है तो उस स्थिति में नाम खण्ड नहीं होता । आप ने किसी को बद्दुआ या आशीर्वाद नहीं देना है, न ही इच्छा करक किसी से आशीर्वाद लेना है कोई आप के सिर पर आशीर्वाद के लिए हाथ रखे तो आपने मना करना है, फिर भी कोई हाथ रख देता है तो आप का उपदेश सुरक्षित है परन्तु आप ने आशीर्वाद व बदृदुआ बिल्कुल नहीं देनी है । क्योंकि आशीर्वाद देने से आप की भक्ति कमाई जाती है । जैसे एक पहिए की ट्रयूब से दूसरे पहिए की ट्यूब में हवा डालने से आप की गाडी खडी हो जाएगी । आप को हानि हो जाएगी । एक उपदेशी बहन ने अपने अनुपदेशी भाई को स्वस्थ होने का आशीर्वाद दे दिया भाई तो स्वस्थ हो गया परन्तु बहन इतनी ,अस्वस्थ हुई की एक "महिना अस्पताल में रही । पुन: उपदेश लिया अपनी गलती की क्षमा याचना करने पर वह स्वस्थ हो पाई । इसलिए सर्व से प्रार्थना है कि यह गलति न करें। इसी प्रकार अन्य नियमों के खण्ड करने से ' आपकी राम नाम की गाडी में पंचर हो जाएगा वह भी रूक "जाएगी अर्थात् आप जी को हानि होगी । पूर्व समय में सतिप्रथा (परम्परा) थी । जिस किसी का पति मर'जाता था तो उसकी स्त्री को भी मृत पति के साथ जिंदा जलाया जाता था जो एक महा जालिम कर्म था उस समय के मानव समाज ने उस कुरीती को मजबूरन मानना पडता था । किसी महापुरूष ने संघर्ष करके उस सतिप्रथा को बन्द कराया । समाज के रूढीवादी व्यक्तियों ने बहुत विरोध भी किया, परन्तु प्रयत्न सफल हुआ तो आज सर्व बहनें सुखी हैं । इसी प्रकार ये सर्व परम्पराएँ जानों जो मानव समाज पर भार हैं । इनको समाप्त करने से ही भार मुक्त हो सकेंगे तथा भक्ति मार्ग पर आसानी से चल सकेंगे ।
2. टी. वी., कम्यूटर तथा मोबाइल में फिल्म, सीरियल, मैच, कार्टून देखना तथा मोबाइल में विडियो गेम आदि नहीं खेलना है ।
3. किसी को दान (बीना सिला कपड़ा, सीधा आदि) नहीं देना हैं, न ही किसी धार्मिक स्थल (मन्दिर, मैण्डी) के लिए पैसे देने हैं और न ही उनक किसी भंडारे में जाना है। जैसेधर्मशाला, गली पवकी करने, कुआं तथा तालाब (जोहड़) की खुदाई, खेतों के साझले नाले की खुदाई तथा अन्य इसी प्रकार के सामूहिक सामाजिक कार्यो के लिए पैसे दे सकते हैं ।
4. माथे पर तिलक न लगाना है और न ही लगवाना है, भात में पटड़े पर नहीं चढ़ना है, गले में माला नहीं डलवानी है और न ही डालनी है और नही किसी की झोली में पैसे डालने या लेने हैं । यदि दोनों पक्ष उपदेशी हैं तो विवाह केवल असुर निकन्दन रमैणी करके साधारण विधि से करना है तथा भात परम्परा को समाप्त करना है
5. कोई त्यौहार, जागरण, मुण्डन, धार्मिक अनुष्ठान जन्मदिन, छटी आदि नही मनाना है, न ही उसमें जाना व सहयोग करना है । ,
6. किसी को दुआ या बदृदुआ नहीं देनी है ।
7. किसी को Good morning, Good afternoon, Good evening, Good night, आदि शब्द नहीं बोलने हैं यदि कोई बोलता है तो उसे समय अनुसार केवल Morning Morning Evening Evening Afternoon व Night Night दो-दो बार बोल दें
8. Happy Birthday, Happy New year, तथा Good bye, आदि शब्द नहीं बोलने हैं यदि कोई आपसे बोलता है तो उसे धन्यवाद या Thank you बोल दे
9. सिक्खों को छोड़कर संत-बाबा रूप में दाढी न हो।
10. बहनों ने नेल पालिस ओर लिपिस्टिक नही लगानी हैं ।
11. परफ्यूम तथा सेंट आदि नहीं लगाना है ।
12. विवाहित बहनें केवल सिन्दूर या बिन्दी में से एक चीज लगा सकती हैं ।
13. किसी अनउपदेशी का झूठा नहीं खाना है यदि अनजान में खाया है तो क्षमा होता हैं । भविष्य में ध्यान रखें ।
14. हाथों पर मेंहदी नहीं लगानी है । किसी बिमारी के कारण लगा सकते है, सिर में लगा सकते हैं । हाथों में मेहंदी लगाने से नाम खण्ड होता है ।
15. शादी में जाते है तो पैसे (शगुन' वारफेरी, मुंह दिखाई पर पैसे) नहीं देने है । विदाई के समय घर में नारियल नहीं फोड़ना है, कन्याविदाई के समय गाडी पर पानी डालना या धवका लगाना आदि सगुन करना मना है ।
16. किसी को किसी भी अवसर पर Gift देना मना है 1 अगर कोई 6111दे तो कोशिश करनी है ना लो 1 अगर कोई पीछे से रख जाऐ या डाक या कोरियर द्वारा भेजे तो उसको रख लें उनके उपलक्ष में कुछ रूपये दान आश्रम में कर दें ।
17. परिवार में किसी की भी शादी हो तो परिवार के अन्य सदस्यों के लिए कपड़े आदि नहीं देने व नहीं लेने हैं ।
18. कन्या दान रूप में कपड़े, गहने आदि नहीं देने हैं। रूपये भी इस उपलक्ष में देने हैं कि आप ने वहां खाना खाया है । और बहन के घर जाते है तो इसी उद्देश्य से पैसे दे सकते हैं कि आपने वहां खाना खाया है या चाय आदि पी है यदि अधिक धन दे दिया तो आप की बहन पर आप का ऋण न हो जाए तथा संस्कार न जुड जाऐं । क्योंकि हम संस्कार वश ही यहां काल जाल में रह जाते हैं । यदि आप पैसा देना चाहें और बहन न लेवे तो दोनों ही भार मुक्त हो जाते हैं । यदि बहन-बुआ जी आदि उपदेशी हैं तो उन को चाहिए कि वह पैसा रूपया-कपड़ा आभूषण कदापि न लें । प्यार से कहें कि आपने कह दिया, हमने मान लिया, ऐसे शिष्टाचार से मना कर दें ।
19. स्कूल में गायत्री मन्त्र बोलते समय ओं३म् शब्द नहीं बोलना है । क्योंकि जिसे गायत्री मंत्र कहते है यह यजुर्वेद कं अध्याय 36 का मंत्र 3 है । मूल पाठ में ओ३म् मन्त्र नहीं है । वेद परमात्मा की अनूठी देन है इसमें वृद्धि या कटौती करना, परमात्मा का अपमान है, लाभ के स्थान पर हानि ही होती है, इस लिए इस मन्त्र के साथ ओउम् नहीं बोलना है । यजुर्वेद के अ. 36 मंत्र 3 अर्थात् कथित "गायत्री मंत्र” मात्र परमात्मा की महिमा का एक मंत्र है । इसे पढने से परमात्मा के गुणों का ज्ञान होता है । जैसे बिजली की महिमा कहीं लिखी हो उसको कविता बनाकर गाते रहने से बिजली के गुणों का ज्ञान है परन्तु बिजली का लाभ नहीं मिल सकता लाभ तो बिजली का कनेक्शन लेने से ही मिलेगा इसी प्रकार यजुर्वेद अध्याय 36 मंत्र 3 जिसको गायत्री मंत्र बताकर जाप करने को कहते हैं वह व्यर्थ है । क्योंकि यह मंत्र तो परमात्मा की महिमा का ज्ञान कराता है । परमेश्वर के गुणों अर्थात् लाभ को बताता है । वह लाभ अधिकारी संत से सत्यनाम व सारनाम की दीक्षा प्राप्त करके अर्थात् कनेक्शन लेकर ही प्राप्त हो सकते हैैं यजुर्वेद अध्याय 36 मंत्र 3 अर्थात् गायत्री मंत्र की आवृर्ति करने से नहीं फिर भी कोई अज्ञानी व्यक्ति विद्यार्थियों को विवश ' करे तो 🕉️ शब्द का उच्चारण न करें केवल गायत्री मंत्र का भुर्भव: स्व: से ही उच्चारण प्रारम्भ करें । "ओ३म" एक अक्षर को न लगाएँ अध्यापकों को चाहिए कि यजुर्वेद अध्याय 36 मंत्र 3 की अपेक्षा सन्त गरीबदास जी महाराज की वाणी से मंगलाचरण विद्यार्थीयों से बुलाए' । गायत्री मंत्र से कई गुणा लाभ होता है परन्तु सत्यनाम बिना सब व्यर्थ है ।
20. किसी मुर्दे के अंतिम संस्कार में लकड़ी डाल सकते हैं ! कंधे पर या'अन्य साधन द्वारा शव को ले जा सकते हैं !
21. मुर्दे पर एक से अधिक कफन नहीं डालना है यदि आप से पहले किसी ने कफन डाल रखा हैं तो आप ने कफन नहीं डालना हैं क्योंकि कफन केवल एक ही होता है अगर पहले कफन डाल रखा है फिर किसी ने एक से ज्यादा कफन डाला है तो नाम खण्ड होता है !
22. शादी में खाना खा सकते है, लड़के या लड़की की शादी में खाना खाकर आते हैं यह मान कर पैसे दे सकते हैं कि आपने वाहां भोजन खाया हैं ।
23. यदि दोनों पक्ष उपदेशी हैं तो पीलिया देना, छुछक देना बन्द करना है । एक पक्ष अनुपदेशी है तो केवल एक २ जोडी कपड़े केवल जच्चा व बच्चे के देने हैं ।
24. नौकरी पर आॅफिस में जब कोई रिटायर होता है तो आॅफिस में सभी आपस में पैसे इकठ्ठे करके उसे Gift तथा पार्टी देते हैं ऐसा कर सकते हैं । (इसमें थोडा बहुत दे सकते हैं) लेकिन उपदेशी ने कतई नहीं लेना है ।
25. घर में जब बहन आती है तो उसे कपड़े व पैसे नहीं देने हैं । अगर बहन या बेटी अनुपदेशी है तो बहुत कम एक २ जोडी कपडे दे सकते है । बच्चों के लिए खाने पीने का सामान दे सकते हैं और अगर जब बहन के घर जाते हैं तो साथ में बच्चों के लिए फल, मिठाई आदि ले जा सकते हैं ।
26. स्कूल में विदाई पार्टी के समय बच्चे पैसे दे सकते हैं ।
27. गौशाला में पैसा नहीं, चारा आदि दे सकते हैं ।
28. शादी की मिठाई कोई घर में लेकर आए तो और कुछ शादी के नाम के कार्ड के साथ मिठाई लाते हैं तो हृदय से मना करें । फिर भी कोई रख जाए तो खा सकते हैं उस के बदले में कुछ रूपये आश्रम में दान कर दें । आप पर भार नहीं रहेगा। अगर उपदेशी परिवार शादी में मिटाई बनाए तो वो आई हुई रिश्तेदारी या बहन को मिठाई बांधकर दे सकते है, परन्तु यह मिठाई बनाने की परम्परा ही गलत है सामान्य भोजन बनाऐं जैसे अतिथि का सत्कार करने के लिए बनाते हैं खीर, खाण्ड हल्वा बना सकते हैं ।
29. भगत भाई आपस में उधार सामान एक दूसरे से ले सकते हैं और अगर आपस में एक दूसरे के घर आते जाते हैं तो बच्चों के लिए खाने पीने का सामान ले जा सकते हैं ।
30. भाई या बहन की आर्थिक स्थिति कमजोर हो तो आर्थिक या अन्य मदद उधार रूप में कर सकते हैं । बहन को चाहिए कि उस पैसे को लौटाए जिस से उस पर भार नहीं बनेगा । यदि बहन धन लौटाने में असमर्थ है तो' भाई कभी बहन पर पैसे लौटाने का दबाब न बनाए ।
31. लड़की की शादी में माता पिता अपनी लड़की को एक दो जोड़ी कपड़े दे सकते हैं पैसे नहीं, अगर लड़के की शादी में लड़की वाले बगैर नाम वाले है और वो अगर जबरदस्ती अपनी लड़की को कुछ देना चाहे तो इसी प्रकार लड़की की शादी में लड़के वाले अनउपदेशी कुछ मांग करे तो स्पष्ट मना कर दें बिल्कुल नहीं लेना देना हैं ।
32. जिन लडकियों का विवाह होता है वे जिन कपड़ो को पहन कर विवाह मण्डप अर्थात रमैणी में बैठे उन्हीं कपड़ों में अपनी ससुराल जाऐं । अन्य पोशाक न बदले किन्हीं परिस्थितियों में बदलनी पडें (जैसे मिट्टी लग जाए' गीली हो जाए या अन्य कारण से खराब हो जाए) तो बदल सकतें हैं । अन्यथा नहीं । देखने में आया है कि कुछ बहनें रमैणी में विवाह के समय सामान्य पोषाक पहनती है‘ बाद ने तड़क भड़क वाली पोषाक पहन कर ससुराल जाती है'
वह मर्यादा के विरूद्ध है । विवाह के समय जैसी भी नई या' पुरानी पोषाक पहन रखी है, उसी को पहन कर ससुराल जाऐ, अन्य या उपरोक्त परिस्थितियों मे' पोषाक बदली जा सकती है ।
33 आपके द्वार पर कोई भिक्षुक आता या कहीं बाजार में आप से कोई भिक्षा माँगता है तो उसे पैसे न दें खाना खिला दें । यदि उसको वस्त्र की आवश्यकता है तो वस्त्र बिना सिला न दें, पुराना या नया सिला हुआ कपड़ा दें ' कम्बल या चादर भी पुराना दें नहीं तो अधिकतर भिक्षुक शराबी कवाबी हैं, नए कपडों को बेचकर शराब आदि नशीली वस्तुओं का प्रयोग करते हैं वह दोष दान करने वाले को भी लगेगा । एक श्रद्धालु ने कहा कि यह अच्छा सा नहीं लगता कि भिक्षुक को रूपये न दें, आत्मा नहीं मानती? उस के लिए उत्तर तथा एक उदाहरण यह है कि एक भद्रपुरूष ने एक भिखारी को 1०० रूपयों की भिक्षा दे दी । पहले वह भिक्षुक पाव शराब पीता था अपनी पत्नी व परिवार को परेशान करता था । उस दिन 100 रूपये प्राप्त होने के कारण उस भिखारी ने आधा बोतल शराब पी ली । शराब के नशे में अपनी पत्नी को पीट डाला । उस भिखारी की पत्नी ने बच्चों समेत आत्महत्या कर लीं । उस जैनटलमैन के सौ रूपये के दान ने एक परिवार को उजाड दिया । इसका दोष दानकर्ता को है । गीता में लिखा है कि कुपात्र को किया दान लाभ के स्थान पर हानि करता है । कबीर परमेश्वर जी कहतें हैं :
गुरु बिन माला फेरते गुरु बिन देते दान । गुरु बिन दोनों निस्फल हैं, पूछो वेद पुरान । ।
34. किसी भी नियम के खण्डित हो जाने पर आप को परमेश्वर से मिलने वाला लाभ बन्द हो जाएगा। जैसे बिजली का कनैक्शन कट जाने पर सर्व लाभ बन्द हो जाते हैं । जो कार्य बिजली से होने थे वे रूक जाते हैं । इसी प्रकार परमात्मा की शक्ति से जो आपको तथा आपके परिवार को लाभ मिलना था वह रूक जाता है । एक बहन ने बताया कि उसके पति ने दीक्षा भी ले रखी है किसी भी नियम का पालन नहीं करता । इसी प्रकार एक भक्त ने अपनी पत्नी की शिकायत की । उसके विषय में यह जाने कि उनका नाम खण्डित हो चुका है ऐसे व्यक्तियों का कोई भयंकर पाप कर्म है । नाम खपिडत होने पर वह पापकर्म अपना प्रभाव करके हानि करेगा जब तक मर्यादा में रहकर भक्ति करते हैं तो वह पाप कर्म हानि नहीं कर सकता ।
एक बहन ने ऐसे ही नाम खपिडत कर रखा था कुछ वर्षों के पस्चात् उसकी जीभ में केंसर का रोग हो गया उस बहन से पूछा कि क्या अब आपको टीवी. देखना, लिपिस्टीक लगाना अच्छा लगता है? उसने रोते हुए कहा नहीं-नहीं ।
इसी प्रकार परिवार व शरीर में हानी से बचने के लिए तथा परमात्मा से लाभ प्राप्त करके मोक्ष प्राप्ति के लिए मर्यादा में रहे अन्यथा पाप कर्म आपको क्षति कर देगा ।
इसलिए सर्व मुपयात्माओं से पुनः निवेदन है कि सर्व नियमों का विधीवत् पालन करके मानव जीवन को सफल बनाये तथा पूर्ण मोक्ष प्राप्त करके सदा सुखी बने, सतलोक में निवास करें ।
जो विद्यार्थी शिक्षा समय में मौज मरती करते हैं वे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं आजीवन कष्ट उठाते हैं । जो शिक्षा के समय मे मौज मस्ती न करके लगन से शिक्षा पूरी कर जाते है तो उनको विद्यालय में किये प्रयत्न का फल बाहर क्षेत्र में नौकरी द्वारा प्राप्त होता है । इसी प्रकार सर्व मानव परमात्मा प्राप्ति के विद्यालय में विद्यार्थी (भक्त) हैं । जो भक्त मौज मस्ती करते हैं । भक्ति तथा नियमों का पालन न करके अन्य प्राणियों के शरीरों में घोर कष्ट उठायेंगे । जो लगन के साथ मर्यादा में रहकर परमेश्वर कबीर जी की भक्ति साधना जगत गुरु संत रामपाल जी महाराज से प्राप्त करके आजीवन करते रहेंगे उनको सत्यलोक में सर्व सुविधाएँ प्राप्त होगी वहाँ वृद्ध अवस्था नहीं है मृत्यु भी नहीं होती ऐसा ही जीवन है, नर-नारी व परिवार है वह कभी मृत्यु को प्राप्त नहीं होता । इसलिए सत्य भक्ति करके अपना जीवन सफल बनायें । जिस सत्य भक्ती से आपको यहां भी सर्व आवश्यक सुउपदेश प्राप्त पुश्यात्माएँ परमात्मा कें मार्ग पा चलतीं हैं । वह परमात्मा प्राप्ति के लिए यात्रा प्रारंभ करती है । यात्री बहुत ही कम सामान लेकर यात्रा करता है । अधिक भार उठा कर यात्रा करना संभव नहीं होता । जो सांसारिक परम्पराऐ हैं, वे व्यर्थ का भार है जो भक्तिमार्ग में यात्रा करने में बाधक हैं ! इसलिए इस भार से मुक्त होने के लिए निम्न नियमों का पालन करना अनिवार्य है .
१. किसी के पैर नहीं छूने हैं और ना ही दूसरे को छूने देना है यदि अचानक या मना करने पर भी पैर छू लेता है तो उस स्थिति में नाम खण्ड नहीं होता । आप ने किसी को बद्दुआ या आशीर्वाद नहीं देना है, न ही इच्छा करक किसी से आशीर्वाद लेना है कोई आप के सिर पर आशीर्वाद के लिए हाथ रखे तो आपने मना करना है, फिर भी कोई हाथ रख देता है तो आप का उपदेश सुरक्षित है परन्तु आप ने आशीर्वाद व बदृदुआ बिल्कुल नहीं देनी है । क्योंकि आशीर्वाद देने से आप की भक्ति कमाई जाती है । जैसे एक पहिए की ट्रयूब से दूसरे पहिए की ट्यूब में हवा डालने से आप की गाडी खडी हो जाएगी । आप को हानि हो जाएगी । एक उपदेशी बहन ने अपने अनुपदेशी भाई को स्वस्थ होने का आशीर्वाद दे दिया भाई तो स्वस्थ हो गया परन्तु बहन इतनी ,अस्वस्थ हुई की एक "महिना अस्पताल में रही । पुन: उपदेश लिया अपनी गलती की क्षमा याचना करने पर वह स्वस्थ हो पाई । इसलिए सर्व से प्रार्थना है कि यह गलति न करें। इसी प्रकार अन्य नियमों के खण्ड करने से ' आपकी राम नाम की गाडी में पंचर हो जाएगा वह भी रूक "जाएगी अर्थात् आप जी को हानि होगी । पूर्व समय में सतिप्रथा (परम्परा) थी । जिस किसी का पति मर'जाता था तो उसकी स्त्री को भी मृत पति के साथ जिंदा जलाया जाता था जो एक महा जालिम कर्म था उस समय के मानव समाज ने उस कुरीती को मजबूरन मानना पडता था । किसी महापुरूष ने संघर्ष करके उस सतिप्रथा को बन्द कराया । समाज के रूढीवादी व्यक्तियों ने बहुत विरोध भी किया, परन्तु प्रयत्न सफल हुआ तो आज सर्व बहनें सुखी हैं । इसी प्रकार ये सर्व परम्पराएँ जानों जो मानव समाज पर भार हैं । इनको समाप्त करने से ही भार मुक्त हो सकेंगे तथा भक्ति मार्ग पर आसानी से चल सकेंगे ।
2. टी. वी., कम्यूटर तथा मोबाइल में फिल्म, सीरियल, मैच, कार्टून देखना तथा मोबाइल में विडियो गेम आदि नहीं खेलना है ।
3. किसी को दान (बीना सिला कपड़ा, सीधा आदि) नहीं देना हैं, न ही किसी धार्मिक स्थल (मन्दिर, मैण्डी) के लिए पैसे देने हैं और न ही उनक किसी भंडारे में जाना है। जैसेधर्मशाला, गली पवकी करने, कुआं तथा तालाब (जोहड़) की खुदाई, खेतों के साझले नाले की खुदाई तथा अन्य इसी प्रकार के सामूहिक सामाजिक कार्यो के लिए पैसे दे सकते हैं ।
4. माथे पर तिलक न लगाना है और न ही लगवाना है, भात में पटड़े पर नहीं चढ़ना है, गले में माला नहीं डलवानी है और न ही डालनी है और नही किसी की झोली में पैसे डालने या लेने हैं । यदि दोनों पक्ष उपदेशी हैं तो विवाह केवल असुर निकन्दन रमैणी करके साधारण विधि से करना है तथा भात परम्परा को समाप्त करना है
5. कोई त्यौहार, जागरण, मुण्डन, धार्मिक अनुष्ठान जन्मदिन, छटी आदि नही मनाना है, न ही उसमें जाना व सहयोग करना है । ,
6. किसी को दुआ या बदृदुआ नहीं देनी है ।
7. किसी को Good morning, Good afternoon, Good evening, Good night, आदि शब्द नहीं बोलने हैं यदि कोई बोलता है तो उसे समय अनुसार केवल Morning Morning Evening Evening Afternoon व Night Night दो-दो बार बोल दें
8. Happy Birthday, Happy New year, तथा Good bye, आदि शब्द नहीं बोलने हैं यदि कोई आपसे बोलता है तो उसे धन्यवाद या Thank you बोल दे
9. सिक्खों को छोड़कर संत-बाबा रूप में दाढी न हो।
10. बहनों ने नेल पालिस ओर लिपिस्टिक नही लगानी हैं ।
11. परफ्यूम तथा सेंट आदि नहीं लगाना है ।
12. विवाहित बहनें केवल सिन्दूर या बिन्दी में से एक चीज लगा सकती हैं ।
13. किसी अनउपदेशी का झूठा नहीं खाना है यदि अनजान में खाया है तो क्षमा होता हैं । भविष्य में ध्यान रखें ।
14. हाथों पर मेंहदी नहीं लगानी है । किसी बिमारी के कारण लगा सकते है, सिर में लगा सकते हैं । हाथों में मेहंदी लगाने से नाम खण्ड होता है ।
15. शादी में जाते है तो पैसे (शगुन' वारफेरी, मुंह दिखाई पर पैसे) नहीं देने है । विदाई के समय घर में नारियल नहीं फोड़ना है, कन्याविदाई के समय गाडी पर पानी डालना या धवका लगाना आदि सगुन करना मना है ।
16. किसी को किसी भी अवसर पर Gift देना मना है 1 अगर कोई 6111दे तो कोशिश करनी है ना लो 1 अगर कोई पीछे से रख जाऐ या डाक या कोरियर द्वारा भेजे तो उसको रख लें उनके उपलक्ष में कुछ रूपये दान आश्रम में कर दें ।
17. परिवार में किसी की भी शादी हो तो परिवार के अन्य सदस्यों के लिए कपड़े आदि नहीं देने व नहीं लेने हैं ।
18. कन्या दान रूप में कपड़े, गहने आदि नहीं देने हैं। रूपये भी इस उपलक्ष में देने हैं कि आप ने वहां खाना खाया है । और बहन के घर जाते है तो इसी उद्देश्य से पैसे दे सकते हैं कि आपने वहां खाना खाया है या चाय आदि पी है यदि अधिक धन दे दिया तो आप की बहन पर आप का ऋण न हो जाए तथा संस्कार न जुड जाऐं । क्योंकि हम संस्कार वश ही यहां काल जाल में रह जाते हैं । यदि आप पैसा देना चाहें और बहन न लेवे तो दोनों ही भार मुक्त हो जाते हैं । यदि बहन-बुआ जी आदि उपदेशी हैं तो उन को चाहिए कि वह पैसा रूपया-कपड़ा आभूषण कदापि न लें । प्यार से कहें कि आपने कह दिया, हमने मान लिया, ऐसे शिष्टाचार से मना कर दें ।
19. स्कूल में गायत्री मन्त्र बोलते समय ओं३म् शब्द नहीं बोलना है । क्योंकि जिसे गायत्री मंत्र कहते है यह यजुर्वेद कं अध्याय 36 का मंत्र 3 है । मूल पाठ में ओ३म् मन्त्र नहीं है । वेद परमात्मा की अनूठी देन है इसमें वृद्धि या कटौती करना, परमात्मा का अपमान है, लाभ के स्थान पर हानि ही होती है, इस लिए इस मन्त्र के साथ ओउम् नहीं बोलना है । यजुर्वेद के अ. 36 मंत्र 3 अर्थात् कथित "गायत्री मंत्र” मात्र परमात्मा की महिमा का एक मंत्र है । इसे पढने से परमात्मा के गुणों का ज्ञान होता है । जैसे बिजली की महिमा कहीं लिखी हो उसको कविता बनाकर गाते रहने से बिजली के गुणों का ज्ञान है परन्तु बिजली का लाभ नहीं मिल सकता लाभ तो बिजली का कनेक्शन लेने से ही मिलेगा इसी प्रकार यजुर्वेद अध्याय 36 मंत्र 3 जिसको गायत्री मंत्र बताकर जाप करने को कहते हैं वह व्यर्थ है । क्योंकि यह मंत्र तो परमात्मा की महिमा का ज्ञान कराता है । परमेश्वर के गुणों अर्थात् लाभ को बताता है । वह लाभ अधिकारी संत से सत्यनाम व सारनाम की दीक्षा प्राप्त करके अर्थात् कनेक्शन लेकर ही प्राप्त हो सकते हैैं यजुर्वेद अध्याय 36 मंत्र 3 अर्थात् गायत्री मंत्र की आवृर्ति करने से नहीं फिर भी कोई अज्ञानी व्यक्ति विद्यार्थियों को विवश ' करे तो 🕉️ शब्द का उच्चारण न करें केवल गायत्री मंत्र का भुर्भव: स्व: से ही उच्चारण प्रारम्भ करें । "ओ३म" एक अक्षर को न लगाएँ अध्यापकों को चाहिए कि यजुर्वेद अध्याय 36 मंत्र 3 की अपेक्षा सन्त गरीबदास जी महाराज की वाणी से मंगलाचरण विद्यार्थीयों से बुलाए' । गायत्री मंत्र से कई गुणा लाभ होता है परन्तु सत्यनाम बिना सब व्यर्थ है ।
20. किसी मुर्दे के अंतिम संस्कार में लकड़ी डाल सकते हैं ! कंधे पर या'अन्य साधन द्वारा शव को ले जा सकते हैं !
21. मुर्दे पर एक से अधिक कफन नहीं डालना है यदि आप से पहले किसी ने कफन डाल रखा हैं तो आप ने कफन नहीं डालना हैं क्योंकि कफन केवल एक ही होता है अगर पहले कफन डाल रखा है फिर किसी ने एक से ज्यादा कफन डाला है तो नाम खण्ड होता है !
22. शादी में खाना खा सकते है, लड़के या लड़की की शादी में खाना खाकर आते हैं यह मान कर पैसे दे सकते हैं कि आपने वाहां भोजन खाया हैं ।
23. यदि दोनों पक्ष उपदेशी हैं तो पीलिया देना, छुछक देना बन्द करना है । एक पक्ष अनुपदेशी है तो केवल एक २ जोडी कपड़े केवल जच्चा व बच्चे के देने हैं ।
24. नौकरी पर आॅफिस में जब कोई रिटायर होता है तो आॅफिस में सभी आपस में पैसे इकठ्ठे करके उसे Gift तथा पार्टी देते हैं ऐसा कर सकते हैं । (इसमें थोडा बहुत दे सकते हैं) लेकिन उपदेशी ने कतई नहीं लेना है ।
25. घर में जब बहन आती है तो उसे कपड़े व पैसे नहीं देने हैं । अगर बहन या बेटी अनुपदेशी है तो बहुत कम एक २ जोडी कपडे दे सकते है । बच्चों के लिए खाने पीने का सामान दे सकते हैं और अगर जब बहन के घर जाते हैं तो साथ में बच्चों के लिए फल, मिठाई आदि ले जा सकते हैं ।
26. स्कूल में विदाई पार्टी के समय बच्चे पैसे दे सकते हैं ।
27. गौशाला में पैसा नहीं, चारा आदि दे सकते हैं ।
28. शादी की मिठाई कोई घर में लेकर आए तो और कुछ शादी के नाम के कार्ड के साथ मिठाई लाते हैं तो हृदय से मना करें । फिर भी कोई रख जाए तो खा सकते हैं उस के बदले में कुछ रूपये आश्रम में दान कर दें । आप पर भार नहीं रहेगा। अगर उपदेशी परिवार शादी में मिटाई बनाए तो वो आई हुई रिश्तेदारी या बहन को मिठाई बांधकर दे सकते है, परन्तु यह मिठाई बनाने की परम्परा ही गलत है सामान्य भोजन बनाऐं जैसे अतिथि का सत्कार करने के लिए बनाते हैं खीर, खाण्ड हल्वा बना सकते हैं ।
29. भगत भाई आपस में उधार सामान एक दूसरे से ले सकते हैं और अगर आपस में एक दूसरे के घर आते जाते हैं तो बच्चों के लिए खाने पीने का सामान ले जा सकते हैं ।
30. भाई या बहन की आर्थिक स्थिति कमजोर हो तो आर्थिक या अन्य मदद उधार रूप में कर सकते हैं । बहन को चाहिए कि उस पैसे को लौटाए जिस से उस पर भार नहीं बनेगा । यदि बहन धन लौटाने में असमर्थ है तो' भाई कभी बहन पर पैसे लौटाने का दबाब न बनाए ।
31. लड़की की शादी में माता पिता अपनी लड़की को एक दो जोड़ी कपड़े दे सकते हैं पैसे नहीं, अगर लड़के की शादी में लड़की वाले बगैर नाम वाले है और वो अगर जबरदस्ती अपनी लड़की को कुछ देना चाहे तो इसी प्रकार लड़की की शादी में लड़के वाले अनउपदेशी कुछ मांग करे तो स्पष्ट मना कर दें बिल्कुल नहीं लेना देना हैं ।
32. जिन लडकियों का विवाह होता है वे जिन कपड़ो को पहन कर विवाह मण्डप अर्थात रमैणी में बैठे उन्हीं कपड़ों में अपनी ससुराल जाऐं । अन्य पोशाक न बदले किन्हीं परिस्थितियों में बदलनी पडें (जैसे मिट्टी लग जाए' गीली हो जाए या अन्य कारण से खराब हो जाए) तो बदल सकतें हैं । अन्यथा नहीं । देखने में आया है कि कुछ बहनें रमैणी में विवाह के समय सामान्य पोषाक पहनती है‘ बाद ने तड़क भड़क वाली पोषाक पहन कर ससुराल जाती है'
वह मर्यादा के विरूद्ध है । विवाह के समय जैसी भी नई या' पुरानी पोषाक पहन रखी है, उसी को पहन कर ससुराल जाऐ, अन्य या उपरोक्त परिस्थितियों मे' पोषाक बदली जा सकती है ।
33 आपके द्वार पर कोई भिक्षुक आता या कहीं बाजार में आप से कोई भिक्षा माँगता है तो उसे पैसे न दें खाना खिला दें । यदि उसको वस्त्र की आवश्यकता है तो वस्त्र बिना सिला न दें, पुराना या नया सिला हुआ कपड़ा दें ' कम्बल या चादर भी पुराना दें नहीं तो अधिकतर भिक्षुक शराबी कवाबी हैं, नए कपडों को बेचकर शराब आदि नशीली वस्तुओं का प्रयोग करते हैं वह दोष दान करने वाले को भी लगेगा । एक श्रद्धालु ने कहा कि यह अच्छा सा नहीं लगता कि भिक्षुक को रूपये न दें, आत्मा नहीं मानती? उस के लिए उत्तर तथा एक उदाहरण यह है कि एक भद्रपुरूष ने एक भिखारी को 1०० रूपयों की भिक्षा दे दी । पहले वह भिक्षुक पाव शराब पीता था अपनी पत्नी व परिवार को परेशान करता था । उस दिन 100 रूपये प्राप्त होने के कारण उस भिखारी ने आधा बोतल शराब पी ली । शराब के नशे में अपनी पत्नी को पीट डाला । उस भिखारी की पत्नी ने बच्चों समेत आत्महत्या कर लीं । उस जैनटलमैन के सौ रूपये के दान ने एक परिवार को उजाड दिया । इसका दोष दानकर्ता को है । गीता में लिखा है कि कुपात्र को किया दान लाभ के स्थान पर हानि करता है । कबीर परमेश्वर जी कहतें हैं :
गुरु बिन माला फेरते गुरु बिन देते दान । गुरु बिन दोनों निस्फल हैं, पूछो वेद पुरान । ।
34. किसी भी नियम के खण्डित हो जाने पर आप को परमेश्वर से मिलने वाला लाभ बन्द हो जाएगा। जैसे बिजली का कनैक्शन कट जाने पर सर्व लाभ बन्द हो जाते हैं । जो कार्य बिजली से होने थे वे रूक जाते हैं । इसी प्रकार परमात्मा की शक्ति से जो आपको तथा आपके परिवार को लाभ मिलना था वह रूक जाता है । एक बहन ने बताया कि उसके पति ने दीक्षा भी ले रखी है किसी भी नियम का पालन नहीं करता । इसी प्रकार एक भक्त ने अपनी पत्नी की शिकायत की । उसके विषय में यह जाने कि उनका नाम खण्डित हो चुका है ऐसे व्यक्तियों का कोई भयंकर पाप कर्म है । नाम खपिडत होने पर वह पापकर्म अपना प्रभाव करके हानि करेगा जब तक मर्यादा में रहकर भक्ति करते हैं तो वह पाप कर्म हानि नहीं कर सकता ।
एक बहन ने ऐसे ही नाम खपिडत कर रखा था कुछ वर्षों के पस्चात् उसकी जीभ में केंसर का रोग हो गया उस बहन से पूछा कि क्या अब आपको टीवी. देखना, लिपिस्टीक लगाना अच्छा लगता है? उसने रोते हुए कहा नहीं-नहीं ।
इसी प्रकार परिवार व शरीर में हानी से बचने के लिए तथा परमात्मा से लाभ प्राप्त करके मोक्ष प्राप्ति के लिए मर्यादा में रहे अन्यथा पाप कर्म आपको क्षति कर देगा ।
इसलिए सर्व मुपयात्माओं से पुनः निवेदन है कि सर्व नियमों का विधीवत् पालन करके मानव जीवन को सफल बनाये तथा पूर्ण मोक्ष प्राप्त करके सदा सुखी बने, सतलोक में निवास करें ।
जो विद्यार्थी शिक्षा समय में मौज मरती करते हैं वे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं आजीवन कष्ट उठाते हैं । जो शिक्षा के समय मे मौज मस्ती न करके लगन से शिक्षा पूरी कर जाते है तो उनको विद्यालय में किये प्रयत्न का फल बाहर क्षेत्र में नौकरी द्वारा प्राप्त होता है । इसी प्रकार सर्व मानव परमात्मा प्राप्ति के विद्यालय में विद्यार्थी (भक्त) हैं । जो भक्त मौज मस्ती करते हैं । भक्ति तथा नियमों का पालन न करके अन्य प्राणियों के शरीरों में घोर कष्ट उठायेंगे । जो लगन के साथ मर्यादा में रहकर परमेश्वर कबीर जी की भक्ति साधना जगत गुरु संत रामपाल जी महाराज से प्राप्त करके आजीवन करते रहेंगे उनको सत्यलोक में सर्व सुविधाएँ प्राप्त होगी वहाँ वृद्ध अवस्था नहीं है मृत्यु भी नहीं होती ऐसा ही जीवन है, नर-नारी व परिवार है वह कभी मृत्यु को प्राप्त नहीं होता । इसलिए सत्य भक्ति करके अपना जीवन सफल बनायें । जिस सत्य भक्ती से आपको यहां भी सर्व आवश्यक सुख सुविधायें प्राप्त होंगी तथा पूर्ण मोक्ष भी मिलेगा ।
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